आज कल लोगों में पेट्स पालने का काफी शौक देखा जाता है। एक वक़्त था जब घर बड़े हुआ करते थे तब लोगों के घरों में जानवर होना आम बात थी लेकिन अब घर छोटे हो गए ऊपर से लोगों के पास वक़्त की भी कमी देखी जाती है ऐसे में वही लोग जानवर पालते हैं जिन्हें पेट्स (कुत्ता, बिल्ली आदि) पालना पसंद होता है।

पेट्स पलना कोई आसान काम नहीं है। जब वो बीमार होते हैं तो उनका मर्ज़ पता करना बेहद मुश्किल काम होता है। आपका डॉगी गुमसुम रहता है, चिड़चिड़ा और कमज़ोर हो गया है, चोट के घाव नहीं भर रहे, कुछ दूर चलने पर ही सांस फूलने लगती है तो इसे हल्के में न लें। क्योंकि आपके डॉगी को Diabetes हो सकती है। ब्लड जांच में कई पालतू डॉगी भी Diabetes पीड़ित पाए गए हैं।

मुरादाबाद, दिल्ली ,पंतनगर, बरेली और लखनऊ की लैब में ब्लड जांच में कई डॉगी Diabetes से पीड़ित मिले। मुरादाबाद की मां पार्वती डॉग क्लीनिक में साल भर में 10 डॉगी के ब्लड सैंपल लिए गए, उनमें सात डॉगी Diabetes पीड़ित पाए गए। मुरादाबाद के रामगंगा विहार निवासी पवन का डागी भी Diabetes पीड़ित पाया गया। बता दें कि रामपुर में मुख्य रूप से जर्मन शेफर्ड, लैब्नाडार, पग, ग्रेट डेन आदि प्रजाति के पालतू डॉगी Diabetes का शिकार हो रहे हैं। 18 वीं पशुगणना में रामपुर में इन प्रजातियों के डॉगी की संख्या 800 थी। पशुपालन विभाग का दावा है कि संख्या बढ़कर 900 हो गई है।

जानें, Diabetes के लक्षण

आवारा देसी कुत्तों के मुकाबले अच्छी नस्ल के पालतू डॉगी में Diabetes रोग तेजी से फैल रहा है। कुत्तो के ब्लड की जांच की प्रक्रिया इंसानों की तरह है। ग्लूकोज लेबल भी इंसानों के बराबर होता है। पीड़ित डॉगी के समय से इलाज और खान-पान पर ध्यान रखने की ज़रुरत है।

गुमसुम रहना, कमजोर और चिड़चिड़ा होना, चोट का घाव देर से भरना, सांस फूलना, मुंह से लार टपकना। जर्मन शेफर्ड, लैब्नाडार, पग, ग्रेट डेन प्रजाति के पालतू डॉगी Diabetes का अधिक शिकार हो रहे हैं। उनकी लैब में डाग के जितने भी ब्लड सैंपल आ रहे हैं, उनमे से 10 फीसदी Diabetes पीड़ित होते हैं।

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