Dhanteras के दिन लक्ष्मी पूजन करने से धन-धान्य की नहीं होती कमी

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हल्की ठंड के साथ ही त्योहारों ने भी दस्तक दे दी है। हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को Dhanteras का त्योहार मनाया जाता है, जो छोटी दिवाली से एक दिन पहले आता है। इस साल Dhanteras 23 अक्टूबर यानी रविवार को है।

Dhanteras के दिन भगवान धनवंतरि की पूजा की जाती है और यह एक शुभ दिन माना जाता है। इस दिन सोने, चांदी के आभूषण और बर्तन आदि चीजें खरीदना शुभ माना जाता है।

जानें, Dhanteras का महत्व

कहते हैं कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन भगवान समुद्र मंथन के दौरान भगवान धनवंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। यह भी मान्यता है कि चिकित्सा विज्ञान के प्रसार के लिए भगवान धनवंतरि ने अवतार लिया था। धनवंतरि को भारत सरकार का आयुष मंत्रालय राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाता है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक़ Dhanteras के दिन लक्ष्मी पूजन करने से धन-धान्य की कमी नहीं होती और लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा भी इस दिन घर में लानी चाहिए। Dhanteras के दिन संध्याकाल में दीपक जलाने की भी प्रथा है। इसे यम दीपक कहते हैं जो यमराज के लिए जलाया जाता है जिससे अकाल मृत्यु को टाला जा सके।

भगवान धनवंतरि को विष्णु का रूप माना जाता है जो हाथ में अमृत कलश धारण किये होते हैं। इन्हें पीतल पसंद है इसलिए Dhanteras को पीतल या अन्य किसी धातु के सामान खरीदे जाते हैं। आरोग्य के देवता धनवंतरि और धन के देवता कुबेर की पूजा Dhanteras के दिन की जाती है।

पूजा का मुहूर्त

धनतेरस पर शाम 6 बजकर 3 मिनट पर त्रयोदशी समाप्त हो रही है, इसलिए शाम 6:03 से पहले ही पूजा करना श्रेष्ठ रहेगा, शाम 5:40 से शुभ चैघड़िया भी शुरू हो जाएगा, इसलिए 23 को धनतेरस पूजा के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त शाम 5:40 से 6:03 तक रहेगा। जो व्यक्ति इस मुहूर्त में धनतेरस पूजन ना कर पाएं, वे इस समय के बाद भी पूजन कर सकते हैं क्योंकि पूरे दिन ही त्रयोदशी तिथि व्याप्त रही है।

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