Home India Mayawati इसलिए नहीं करना चाहती AIMIM से गठबंधन, जानें वजह

Mayawati इसलिए नहीं करना चाहती AIMIM से गठबंधन, जानें वजह

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UP Election आने से पहले सभी पार्टियां तैयारी में जुट गई हैं। AIMIM के चीफ असदुद्दीन आवैसी ने यूपी विधानसभा चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ने का ऐलान किया है। ओवैसी बीएसपी के साथ गठबंधन करना चाहते थे लेकिन बीएसपी सुप्रीमों Mayawati ने ‘वोट कटवा’पार्टी से गठबंधन करने से इंकार दिया है।

Mayawati के इंकार के बाद बताया जा रहा है कि ओवैसी ने बीएसपी के हाथी पर लगाम के लिए प्लान तैयार किया है। वह चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी से गठबंधन करने की कोशिश में लगे हैं। बीएसपी सुप्रीमो Mayawati ने AIMIM से गठबंधन की खबरों से इनकार कर दिया था। इसके बाद AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने बीते दिनों ट्वीट कर जानकारी दी थी कि ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लेड़ेंगे। यूपी विधानसभा चुनाव में 100 सीटों पर अपने प्रत्याशियों को उतारने के बात कही थी।

AIMIM चीफ असदुद्दीन औवैसी यूपी में दलित और मुस्लिम वोटरों के बीच अपनी पैठ बनाना चाहते हैं। इसी वजह से बीएसपी प्रमुख Mayawati ने ओवैसी से गठबंधन नहीं किया। असदुद्दीन ओवैसी चंदशेखर की आजाद समाज पार्टी से गठबंधन कर दलित और मुस्लिम वोटरों के बीच पैठ बनाने की योजना बना रहे हैं। AIMIM और आजाद समाज पार्टी के बीच गठबंधन होता है, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान बीएसपी को होगा, और सबसे बड़ा फायदा बीजेपी को होने वाला है।

असदुद्दीन ओवैसी के पास यूपी में ज्यादा कुछ खोने के लिए नहीं है। ऐसे हालातों में वह खेल बिगाड़ सकते हैं। ओवैसी पूर्वांचल में ओम प्रकाश राजभर के ‘भागीदार संकल्प मोर्चा’के साथ हैं। वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी और मध्य यूपी में चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी से गठबंधन की चर्चाएं चल रही हैं।

जानें Mayawati ने क्यों नहीं किया AIMIM से गठबंधन

बीएसपी सुप्रीमो Mayawati को राजनीति का माहिर खिलाड़ी माना जाता है। Mayawati इस बात को जानती हैं कि यदि यूपी विधानसभा चुनाव में AIMIM से गठबंधन कर लिया, तो असदुद्दीन ओवैसी दलित और मुस्लिम वोटरों में सेंध लगाने में कामयाब हो जाएंगे। इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलेगा। भविष्य में होने वाले चुनावों में पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) को बीजेपी की ‘बी’पार्टी कहा जाता है। इसके साथ ही AIMIM को ‘वोट कटवा’पार्टी भी कहा जाता है। पिछले साल बिहार में हुए विधानसभा चुनाव में AIMIM ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसका सबसे बड़ा फायदा बीजेपी को मिला था। आरजेडी और कांग्रेस गठबंधन को नुकसान उठाना पड़ा था।

यूपी में Mayawati यह गलती दोहराना नहीं चाहती हैं। इसके साथ ही Mayawati इस बात को ठीक तरह से जानती है कि यदि AIMIM से गठबंधन किया तो पार्टी की छवि धूमिल होगी। इसके साथ ही विपक्षी पार्टियों के निशाने पर आ जाएंगी।

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