बच्चे 7 बजे स्कूल जा सकते हैं, तो जज 9 बजे Court क्यों नहीं आ सकते : जस्टिस ललित

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Supreme Court हो या कोई और Court यहां के जो चक्कर लगाता है उसे ही पता होता है कि Court में कितना वक़्त बर्बाद होता है। ऐसे में Supreme Court के जस्टिस यू यू ललित ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि अगर बच्चे सुबह सात बजे स्कूल जा सकते हैं तो जज और वकील 9 बजे से अपना काम क्यों नहीं शुरू कर सकते?

जस्टिस ललित इस साल अगस्त में चीफ जस्टिस बनने वाले हैं। मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना के रिटायर होने के बाद वह 27 अगस्त से 8 नवंबर तक वह चीफ जस्टिस रहेंगे। उन्होंने कहा कि Supreme Court की बेंच 9 बजे शुरू होनी चाहिए और साढ़े ग्यारह बजे आधे घंटे का ब्रेक हो। उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद 12 बजे शुरू करके दो बजे तक सुनवाई होनी चाहिए। इससे शाम शाम को ताजा मामलों और ऐसे मामलों के लिए ज्यादा वक्त मिलेगा, जिनके लिए लंबी सुनवाई की ज़रूरत होती है।

Supreme Court की बेंच साढ़े दस बजे असेंबल होती है और उसके बाद मामलों की सुनवाई शुरू होती है, जो चार बजे तक चलती है। इसी दौरान एक से दो बजे के दौरान लंच ब्रेक रहता है। हालांकि, इस प्रैक्टिस के उलट जस्टिस ललित ने शुक्रवार को साढ़े नौ बजे केस की सुनवाई शुरू कर दी। उनकी बेंच में जस्टिस एस रविंद्र भट और सुधांशु धूलिया भी हैं।

ज़मानत के एक मामले में पेश हुए देश के पूर्व अटॉर्नी जनरल और नामी वकील मुकुल रोहतगी ने तय वक्त से पहले कार्यवाही शुरू करने के लिए बेंच की तारीफ की और कहा कि मैं यह कहना चाहूंगा कि यही वक्त कोर्ट की कार्यवाही शुरू करने के लिए ज्यादा उचित है।

इसपर जस्टिस ललित ने जवाब दिया कि मेरा हमेशा से यह मत रहा है कि Court की कार्यवाही जल्दी शुरू होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “आदर्श रूप से तो हमें सुबह 9 बजे शुरू कर देना चाहिए। जब बच्चे सुबह सात बच्चे स्कूल जाते हैं तो हम 9 बजे काम शुरू क्यों नहीं कर सकते हैं।” उन्होंने यह टिप्पणी शुक्रवार को Supreme Court में समय से पहले सुनवाई शुरू करने के बाद की।

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