जम्मू में एयरफोर्स स्टेशन पर हुए ड्रोन हमले में भले ही ज्यादा नुकसान ना हुआ हो लेकिन इस हमले ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है क्योंकि ये हमला सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर है यही वजह है कि इस हमले की जांच का जिम्मा NIA को सौंप दिया गया है और सुरक्षा एजेंसियां इस हमले की तह तक पहुंचने में जुट गई है। इस हमले के बाद बुधवार को दिल्ली में भी अहम बैठक होनी है जिसमें इस हमले को लेकर भी चर्चा के आसार हैं लेकिन आखिर छोटे से दिखने वाले ये Drone इतने खतरनाक क्यों होते हैं।

अगर इसकी वजहों को तलाशें तो हम पाएंगे कि ये बेहद सस्ते होते हैं, इतने सस्ते की इन्हें कोई भी ऑनलाइन खरीद सकता है। कोई किस मकसद से Drone खरीद रहा है यह पता लगाना भी मुश्किल होता है इसके अलावा ड्रोन को ऑपरेट करने के लिए ज्यादा तकनीकी जानकारी की भी जरूरत नहीं होती। जीपीएस से छोटे पेलोड को आसानी से कहीं भी भेजा जा सकता है और अगर इन ड्रोन से जरुरत का सामान ले जाया जा सकता है तो फिर इनसे बम बी ले जाए जा सकते हैं ड्रोन्स को पकड़ने के लिए सबसे बड़ी परेशानी ये होती है कि ये बैटरी से चलते हैं और मैनुअली भी ऑपरेट किए जा सकते हैं और ये सिविल और मिलिट्री रडार की पकड़ में नहीं आते क्योंकि इनका रडार क्रॉस सेक्शन बहुत छोटा होता है

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