ढाई लाख का ईनाम घोषित किय, NSA के तहत कार्रवाई शुरू की, लेकिन क्यों कोई फायदा नहीं हुआ?

कुख्यात गैंगस्टर, ढाई लाख का ईनामी बदमाश, 8 पुलिस वालों को बेरहमी से मौत के घाट उतारने वाला कातिल और 60 मुकदमों का दोषी विकास दुबे कौन है? क्या है आखिर विकास दुबे का अस्तित्व? कहां से आया? किसका समर्थन मिला और इतना बड़ा बदमाश कैसे बना। गैंगस्टर विकास दुबे का इतिहास आज एबी स्टार आपके सामने रखेगा।

विकास दुबे एक मिश्रण है जी हां मिश्रण खाकी का, खादी का और अपराध का । खाकी और खादी का वो समर्थन इस गैंगस्टर को मिला कि ये अपराध की दुनिया का मालिक बन गया।

 ये 28 साल पहले की बात है जब विकास दुबे बदमाश विकास दुबे ने जुर्म की दुनिया में पहला कदम रखा था। 28 साल पहले 1992 में गांव के एक दलित युवक की हत्या कर जुर्म की दुनिया में अपना नाम दर्ज करा लिया था। इसके बाद शुरू हुआ विकास का खूनी सफर और जिसके बाद किसी का खून करने से पहले उसके हाथ नहीं कांपे। एक के बाद एक अपराध कर वो आगे बढ़ता रहा और अपना खौफ लोगों की नजरों में बढ़ाता रहा। अपनी अपराधों की शुरूआत करने के बाद विकास ने साल 2000 में एक स्कूल के प्रिंसिपल को मारा उसके बाद साल 2001 में भाजपा नेता संतोष शुक्ला जो एक दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री थे उनकी शिवली थाने में छह गोलियां मारकर विकास ने हत्या कर दी थी। उसके बाद भी उसकी आपराधिक घटनाएं जारी रहीं।

कानपुर में 3 जुलाई को देर रात दबिश देने गई पुलिस टीम के आठ जवानों को मौत की नींद सुलाने वाले विकास दुबे का अपराध करने का सिलसिला जब शुरू हुआ तो ये आगे बढ़ता ही चला गया। बता दें विकास को हमेशा राजनीतिक संरक्षण मिलता गया और उसका अपराध बढ़ता गया। बता दें पहले अपराध के समय पूर्व विधायक नेकचंद्र पांडे ने विकास को संरक्षण दिया था। विकास अपने क्षेत्र में हमेशा दबंगई करता रहा, मारपीट करता रहा। जब भी पुलिस उसके थाने में ले जाती नेताओं के फोन आने शुरू हो जाते। कुछ दिनों बाद तो पुलिस ने भी विकास पर नजर रखना छोड़ दी। बिकरु और शिवली के आसपास क्षेत्र में विकास की दहशत कुछ इस कदर फैल चुकी थी कि उसके एक इशारे पर चुनाव में वोट गिरना शुरू हो जाते थे।

जिसके बाद चुनावी रंजिश में ही विकास की दुश्मनी लल्लन बाजपेई से हुई। इस के बाद से ही राजनीतिक संरक्षण और दबंगई के बल पर विकास जिला पंचायत सदस्य चुना गया और आसपास के तीन गांवों में उसके परिवार की ही प्रधानी कायम हुई । विकास के खिलाफ चौबेपुर थाने में हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी वसूलना, लूट और फिरौती मांगने समेत कई संगीन धाराओं में 60 मुकदमे दर्ज हैं। विकास के खिलाफ गुंडा एक्ट और गैंगस्टर की कार्रवाई भी की जा चुकी है।

साल 2017 में विकास को यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार भी किया था। इसी तरह विकास अपने और अपने आकाओं के लिए कुख्यात भू माफिया बन बैठा। बताते दें कि कानपुर नगर, इटावा, कानपुर देहात, औरैया तक विकास की बादशाहत कायम है। इन जिलों में कहीं भी कोई कीमती जमीन दिखती तो उसकी सौदेबाजी विकास दुबे और गुर्गों के जरिये की जाती। आसपास के कई जिलों के प्रॉपर्टी डीलर भी उससे अपना काम निकलवाने लगे।

महंगी जमीन को सस्ते में खरीदवाकर विकास अपना मोटा कमीशन लेता था। उसकी कमाई का यही असली जरिया था। बताते हैं कि विकास दुबे की कानपुर, लखनऊ, आगरा समेत प्रदेश के कई शहरों में कीमती जमीनें और मकान हैं, जिनकी कीमत करोड़ों में है। विकास की पत्नी और एक बेटा लखनऊ के ही एक मकान में रहते हैं। बता दें कि विकास मकान अपने ठिकाने बदलने के लिए खरीदता था।

बता दें कि कि 3 जुलाई को विकास गुप्ता को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम के 8 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे और सात पुलिस कर्मी घायल हो गए थे। मुठभेड़ के बाद में पुलिस ने एके-47 राइफल और अन्य हथियारों के बीच एक इंसास राइफल सहित हथियार बरामद किए।

मुठभेड़ के बाद अभी शहीदों की राख ठंडी भी नहीं हुई थी कि राजनीति होना शुरू हो गई।

सूबे की योगी सरकार पर इस दौरान हर तरफ से हमला बोला गया। सपा हो या बसपा हो या फिर हो कांग्रेस सभी की तरफ से प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा गया।

एक बार जरा आप भी देख लीजिए विपक्षियों की प्रतिक्रिया-

समाजवादी पार्टी- ट्वीट


मायावती बसपा सुप्रीमो –ट्वीट

प्रियंका गांधी वाड्रा, महासचिव कांग्रेस- ट्वीट

राहुल गांधी, पूर्व अध्यक्ष, कांग्रेस- ट्वीट

rahul gandhi

बहरहाल हमने आपको चारो तरफ से आयी हुई प्रतिक्रियायें दिखाई। इसके साथ ही अब आपको ये भी बता दें कि विकास दुबे को पकड़ने के लिए सीएम योगी ने साफ कह दिया है कि उसके खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई की जाये जिसके बाद विकास का कानपुर वाला मकान गिराया गया और जो खबर सामने आयी थी कि विकास नेपाल में छिपकर बैठा है जिसके बाद नेपाल पर सीमा पर चौकसी देखी गई। बहराइच के रुपईडीहा पर भी बैरिकेटिंग कर वहां विकास के पोस्टर चस्पा कर दिये गये और उसके ऊपर ढाई लाख का ईनाम भी घोषित किया गया है। जिसके बाद पुलिस की 60 टीमें गठित कर दी गई हैं जिसमें 900 पुलिस जवान लगाए गए हैं। इसमें मंडल स्तर पर पुलिस की 40 टीमों को लगाया गया है और मुख्यालय स्तर से भी 20 टीमों को मोस्टवांटेड विकास दुबे की तलाश में लगाया गया है। इसमें एसटीएफ की भी छह टीमें शामिल हैं।

गौरतलब है कि इतने दिन बीत गये हैं टीमें भी गठित कर दी गई हैं लेकिन अभी तक विकास दुबे पुलिस की गिरफ्त से दूर है। न जाने कौन सा वक्त होगा कि विकास दुबे कानून की गिरफ्त में होगा और मुठभेड़ में हुए उन 8 शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों को शांति मिलेगी।

ABSTARNEWS के ऐप को डाउनलोड कर सकते हैं. हमें फ़ेसबुकट्विटरइंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो कर सकते है