कांग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे ने एक भड़काऊ पोस्ट  सोशल मीडिया पर शेयर की.

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु जिसका नाम सुनते ही मन में जो तस्वीर बनती है वो बहुत खूबसूरत, शांत और शिक्षित शहर के रूप में दिखाई देती है. लेकिन सोशल मीडिया के एक पोस्ट ने पूरे शहर की तस्वीर सामने रख दी है और ये साबित कर दिया है कि शहर की ये छवि महज एक भ्रम है. मामला कुछ यूं है कि कांग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे ने एक भड़काऊ पोस्ट  सोशल मीडिया पर शेयर की. इस पोस्ट ने लोगों को भड़का दिया और इस कद्र भड़का दिया कि आगजनी शुरू हो गई  पत्थर बरसने लगे. तोड़फोड़ होने लगी. हालात बेकाबू हो गए पुलिस को सबकुछ काबू में करने के लिए जो आखिरी फैसला लेना पड़ा वो फायरिंग का फैसला था. तीन लोग मारे गए सैकड़ों घायल हुए.

पोस्ट होने के चंद घंटे के भीतर ही हजारों की संख्या में लोग इकठ्ठा हो गए.

इस पर मंथन अपने अपने नज़रिए से जारी है. फिलहाल एक बात तो तय है कि ये सबकुछ अचानक से हो जाने वाली घटना नहीं है. सैकड़ों वाहनों का फूंका जाना पूरे थाने को आग के हवाले कर देना अचानक से तो नहीं हो सकता है. पोस्ट होने के चंद घंटे के भीतर ही हजारों की संख्या में लोग इकठ्ठा हो गए. पेट्रोल बम और पत्थर का इस्तेमाल भी खूब किया गया. मंत्री जी ने साफ कहा है कि वो  इसकी भरपाई उन्हीं लोगों से करेंगें जिन्होंने इसको अंजाम दिया है.

बेंगलुरु हिंसा में,धारा 144 लागू

खबरों की मानें तो इस पूरे घटना की शुरुआत एक भड़काऊ पोस्ट की वजह से हुई. जिसका विरोध स्थानीय लोगों ने किया. स्थिति खराब होने पर इस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया. लेकिन कुछ असमाजिक किस्म के लोगों ने विधायक के आवास पर तोड़फोड़ शुरू कर दी. पुलिस ने तकरीबन 150 लोगों को गिरफ्तार भी किया है. अब सवाल उठता है कि क्या एक भड़काऊ पोस्ट का विरोध इस तरह होना चाहिए. माना पोस्ट असामाजिक था अमर्यादित था लेकिन इसके जवाब में जो हिंसा की घटना हुई वो  तो इससे भी ज़्यादा अमर्यादित और अशोभनीय था. किसी भी भड़काऊ पोस्ट या बयान का विरोध करने का अधिकार सभी को है लेकिन इसी विरोध के नाम पर हिंसा करने का अधिकार किसी को भी नहीं है और अगर विरोध के नाम पर हिंसा होती है तो कानून आपको बख्श देने वाला नहीं है.

फिलहाल हमें दो चीज़ों की ज़रूरत है.

पहली यह कि समाज को धर्म और जाति के बीच भड़का कर लोगों को उकसाने वालों के लिए कठोर सजा का प्रावधान हो ताकि किसी भी धर्म या जाति के लोगों को ठेस पहुंचाने के कार्य पर लोगों में एक डर पैदा हो और कोई भी वयक्ति किसी भी धर्म या जाति के लोगों को उकसा न सके.दूसरा ये  कि हिंसा को अंजाम देने वाले लोगों की असल पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्यवाई हो ताकि हिंसा को अंजाम देने वालों में इसका भय साफतौर पर हो.

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