सूरत के पॉवरलूम यूनिट बंद करने की दी गई चेतावनी

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सूरत के पॉवरलूम यूनिट बंद करने की दी गई चेतावनी

नोएडा की इंडस्ट्रीज़ में दिखा सन्नाटा, कारोबारियों को लॉकडाउन से पहुंचा भारी नुकसान

लॉकडाउन के बीच कारोबारियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है लेकिन फिर सरकार के द्वारा कारोबारियों की सहूलियत के लिए उद्दोग धंधे शुरू कर दिये गये लेकिन फिर भी कारोबारियों को सरकार की इस मदद का कोई फायदा नहीं हुआ। फैक्ट्रियां शुरु हुईं लेकिन उन फैक्ट्रियों में काम करने के लिए पर्याप्त संख्या में न तो मजदूर मिले और न ही खरीद करने के लिए ग्राहक। मिला तो सिर्फ बिजली का बिल और बढ़ा हुआ जीएटी। जी हां आज हम आपको गुजरात के सूरत और यूपी में नोएडा के कारोबारियों की स्थिति के बारे में बतायेंगे।

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सबसे पहले गुजरात में सूरत के पॉवरलूम के बारे में बात करें तो शहर के तकरीबन ढाई हजार पावरलूम में काम ठप होता जा रहा है। कपड़े पर लगाए गये जीएसटी और लॉकडाउन के दौरान काम न होने पर भी दिए गये लंबे-चौड़े बिजली के बिल को देख नाराज कारोबारियों ने सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि लगाया गया टैक्स नहीं हटाया गया तो 15 जून से पॉवरलूम यूनिट बंद कर देंगे क्योंकि लॉकडाउन के बीच में कोई कमाई तो हुई नहीं जो जमा पूंजी थी वो भी खत्म हो गई अब वो कहां से टैक्स भरेंगे, कहां से बिजली का बिल भरेंगे।

सूरत में करीब ढाई हजार लूम हैं, जिनसे इतने ही परिवार भी जुड़े हैं। यानी कि शहर की 20 हजार की आबादी की रोजी-रोटी इन लूम से ही चलती है। सरकार ने कपड़े पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगाया है। जिसका पावरलूम उद्योग विरोध कर रहा है। शहर में करीब 70 साल से ये उद्योग चल रहे हैं। इन उद्योगों में बना लट्ठा, फलालेन, ग्रे-कॉटन क्लॉथ, रजाई खोल, प्रिंटेड बेडशीट यूपी, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, जम्मू सहित देश के कई राज्यों में जाता है। लेकिन जीएसटी लगने के कारण पावरलूम उद्योग संकट में हैं। शहर में उद्योगपतियों की संख्या 100 से ज्यादा नहीं है। इनमें बना कपड़ा बिक्री के लिए विक्रमादित्य क्लाथ मार्केट में करीब 6 दुकानें और मार्केट में छोटी-बड़ी 500 दुकाने हैं।

सूरत के उद्योगपतियों का कहना है कि जीएसटी के विरोध में 15 जून को भी उद्योगपति विरोध दर्ज करा चुके हैं। लेकिन सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया। जीएसटी के विरोध में उज्जैन के साथ बुरहानपुर, इचलकरंजी, सूरत और अन्य शहरों में भी कपड़ा उद्योग बंद रहे हैं। वहीं अगर नोएडा की बात करें तो लॉकडाउन ने जीवन की रफ्तार को थाम दिया है। लोग अच्छे-बुरे दोनों अनुभव का सामना कर रहे हैं। लेकिन लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर उद्योग-व्यापार पर पड़ा है। कारोबारियों को काफी उम्मीद थी कि सरकार जब लॉकडाउन में कारोबार शुरू करने अनुमति देगी तो जीवन वापस पटरियों पर दिखेगा लेकिन जब कारोबार खोलने की अनुमति दी गई तो उसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही निकली।

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सूत्रों के अनुसार औद्योगिक संगठन ने सिर्फ अप्रैल में ही 10 से 15 हजार करोड़ रुपये के नुकसान की और उद्योग बंद होने से 10 लाख से ज्यादा श्रमिकों के बेरोजगार होने की बात कही थी। वहीं नोएडा इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन (नीवा) के अध्यक्ष दलजीत सिंह ने भी बताया कि देश की अर्थव्यवस्था को उद्यमी-व्यापारी ही ठीक कर सकते हैं। लेकिन इन्हें सरकार का सहारा नहीं मिलेगा तो ऐसा कर पाना मुश्किल होगा। उद्योग चलाने के लिए सरकार ने जो शर्तें लागू की थी, उसके आधार पर 50 फीसदी उद्यमी इकाइयों को बंद रखा गया। उधर श्रमिकों के पलायन के कारण पर्याप्त संख्या में कामगार न मिलपाने से और फिर इंडस्ट्रीज बंद होने के बाद भी बिजली के बिल से परेशान उद्दोगपतियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा जिसका नतीजा ये है कि बड़ी संख्या में इंडस्ट्रीज़ बंद देखी गई हैं। साफ देखा जा सकता है कि सूरत के लूम यूनिट्स और नोएडा की इंडस्ट्रीज़ लगभग एक ही हालात से गुजर रही हैं। देश में कई और भी जगह हैं जहां उद्दयोगपतियों को लॉकडाउन का नुकसान झेलना पड़ रहा है।

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