Varanasi बनने जा रही है ग्लोबल सांस्कृतिक-पर्यटन राजधानी, बढ़ेंगे रोज़गार के मौके

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Varanasi ख़ूबसूरत जगह होने के साथ ही देश-दुनिया में सांस्कृतिक राजधानी के रूप में पहचाना जाता है लेकिन अब वाराणसी को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की पहली सांस्कृतिक एवं पर्यटन राजधानी घोषित किया जाएगा। एससीओ के महासचिव झांग मिंग ने शुक्रवार (15 जुलाई) को यह जानकारी दी।

Shanghai Cooperation Organization (SCO) की शुक्रवार को चीन के शंघाई में हुई बैठक में काशी के पर्यटन और सांस्कृतिक राजधानी घोषित होने पर शहरवासी खुश हैं। इससे यहां के पर्यटन व संस्कृति विकास को पंख लगेंगे। सितंबर 2022 से सितंबर 2023 तक के लिए चुना गया है। इसके बाद अब संगठन से जुड़े देशों के पर्यटकों का आगमन बढ़ जाएगा।

महासचिव झांग ने कहा कि नई पहल के तहत Varanasi वर्ष 2022-23 के लिए एससीओ की सांस्कृतिक एवं पर्यटन राजधानी बनेगा। इसके तहत सदस्य देशों को बारी-बारी से मौका मिलेगा। यह पहल आठ सदस्य देशों में लोगों से लोगों के बीच संपर्क और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए है। कहा, हम बारी-बारी से मौका देने की प्रणाली लागू करने वाले हैं। हम सदस्य देशों के लिए बारी-बारी से सांस्कृतिक एवं पर्यटन राजधानी का खिताब देंगे। उन्होंने कहा कि सबसे पहले यह खिताब भारत के प्राचीन शहर वाराणसी को दिया जाएगा।

झांग ने यहां मीडिया से कहा कि इस पहल के तहत हर साल बारी-बारी से सदस्य देश के किसी सांस्कृतिक विरासत वाले शहर को (जो अध्यक्षता करेगा) को यह खिताब दिया जाएगा ताकि उसका महत्व बढ़े। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि फरवरी में लगभग 100 पेज में बनारस का डोजियर बनाकर सांस्कृतिक और पर्यटन राजधानी घोषित कराने का प्रस्ताव प्रदेश सरकार व संस्कृति मंत्रालय को भेजा गया था। जिसमें काशी की महत्ता, उसकी प्राचीनता, गंगा, घाट, मंदिर, सांस्कृतिक विरासत, साहित्य, कला, कलाकार, पौराणिक व आधुनिक शिक्षा के बारे में पूरी जानकारी दी गई थी। साथ ही साल भर तक होने वाले आयोजन, खानपान सहित अन्य चीजों को प्रमुखता से उल्लेखित किया गया। मंडलायुक्त ने बताया कि पर्यटन व सांस्कृतिक राजधानी घोषित होने से रोज़गार के मौके भी बढ़ेंगे।

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