पाक में सिख लड़की का जबरन धर्म परिवर्तन: हरभजन ने की कड़ी कार्रवाई की मांग

0
561
सिख लड़की ने मर्जी से क़बूला इस्लाम

पाकिस्तान बौखलाहट में ओछे हथकंडे आज़मा रहा है, हिन्दू लड़की को अगवा कर किया उसका धर्म-परिवर्तन

पाकिस्तान की शर्मनाक हरकतों का तो मानो अंत ही नहीं हो रहा है। चाहे आतंकवादियों को शय  देने का मामला हो, या जबरन धर्म परिवर्तन करवाने का। एक तरफ तो अनुच्छेद 370 हटने के बाद पाकिस्तान पूरी तरह से बौखला गया है और दुनियां भर में कश्मीरी मुसलमानों को बचाने की दुहाई देता घूम रहा है। उधर  दूसरी तरफ पाकिस्तान से एक सिख लड़की का जबरन धर्म परिवर्तन करवाने का मामला सामने आया है।

पाकिस्तान में कुछ मुसलमानों ने एक शर्मनाक घटना को अंजाम दिया है। दरअसल गुरु नानक की 550वीं जयंती से कुछ दिन पहले,  कई पाकिस्तानियों ने गुरुद्वारे में ग्रंथी के तौर पर सेवा करने वाले एक व्यक्ति की बेटी को बंदूक की नोक पर अगवा कर लिया था और  ज़बरदस्ती उसका धर्म परिवर्तन करवाकर, उसका एक मुसलमान युवक से निकाह करवा दिया था। पाकिस्तान में धर्म परिवर्तन का यह पहला मामला नहीं है। ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है। पहले भी मुसलमानों ने किसी हिन्दू, सिख या ईसाई लड़कियों  का ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन करवा कर उनकी शादी किसी मुसलमान युवक से करवाई है।

Image result for लड़की का जबरन धर्म परिवर्तन करवाने का मामला सामने आया है।

भारतीय बल्लेबाज हरभजन सिंह ने इस मामले का जमकर विरोध किया है। उन्होंने अपने ऑफिशल ट्विटर हैंडलर पर ट्वीट कर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है। हरभजन ने कैप्टन अमरिंदर सिंह का ट्वीट रीट्वीट करते हुए लिखा है कि इसे यहीं रोकने की ज़रूरत है। हर धर्म खूबसूरत है। किसी को भी धर्मांतरित करने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। भगवान केवल एक है। केवल भगवान ये तय करते हैं कि हम किस धर्म में पैदा होंगे। हमें खुद भगवान बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इस पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

पाकिस्तान अपने नाम के बिलकुल विपरीत काम करता है। ये तो वही बात हो गई कि आँख का अंधा और नाम नयन सुख। पाकिस्तान की क्रूर नीतियों पर पहले भी कई बार टिप्पणियाँ हो चुकी हैं। सालों बीत गए पर पाकिस्तान आज तक भारत से दुश्मनी निभाने के बारे में ही सोचता चला आ रहा है। साथ ही आतंकवादियों को हमेशा से ही शह देता रहा है। अब वक्त आ गया है कि उन्हें अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र की सलाह पर अमल करना चाहिए। उसे भारत के आंतरिक मामलों से ध्यान हटा देना चाहिए और कश्मीर का रोना छोड़ कर अपने देश की कानूनी व्यवस्था पर ध्यान देने चाहिए।