एपीजी ने पाकिस्तान ने 26/11 के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और जमात उद-दावा से संबंधित आतंकियों पर लगाए गए प्रतिबंधों का पूरी तरह से पालन नहीं किया है।

एशिया/पैसिफिक ऑन मनी लॉन्ड्रिंग (एपीजी) ने शनिवार को मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग पर अपनी जारी की गई रिपोर्ट मे पाकिस्तान को एक बड़ा झटका दिया है। उसने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् की प्रतिबंध समिति 1267 द्वारा 26/11 के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और जमात उद-दावा से संबंधित अन्य आतंकियों पर लगाए गए प्रतिबंधों का पूरी तरह से पालन नहीं किया है। बल्कि पाक मे उन्हें पनाह देकर उनको और बढ़ावा दिया है। एपीजी ने अपनी रिपोर्ट मे यह भी बताया है कि पाक का यही रवैया लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों के साथ भी है।

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एपीजी ने म्युचुअल इवैलुएशन रिपोर्ट ऑफ पाकिस्तान नाम की रिपोर्ट में कहा है कि देश को अपने धन शोधन या आतंकी वित्तपोषण के जोखिमों की ‘पहचान, आकलन और समझ होनी चाहिए। जिसमें पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी समूहों जैसे कि दाएश, अल-कायदा, जमात-उद-दावा से जैश-ए-मोहम्मद सहित अन्य आतंकी समूहों से जुड़े जोखिम शामिल हैं। यह रिपोर्ट पाकिस्तान की तमाम कोशिशों के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई है। क्योंकि उसने हाल ही में कहा था कि अब पाकिस्तान में कोई आतंकी संगठन सक्रिय नहीं है। पाकिस्तान पर ब्लैक लिस्ट होने का खतरा भी मंडरा रहा है। मनी लांड्रिंग पर नजर रखने वाली अतंरराष्ट्रीय एजेंसी एफएटीएफ ने जून 2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया था और उसे 15 महीने का समय दिया था।

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पाकिस्तान को मिली डेडलाइन सितंबर में खत्म हो चुकी है। माना जा रहा है कि एफएटीएफ पेरिस में 13 से 18 अक्तूबर के बीच होने वाली बैठक में मामले की अंतिम समीक्षा करेगा। इसलिए ऐसे समय पर एपीजी की ऐसी रिपोर्ट का आना पाकिस्तान के लिए खतरे से खाली नहीं है।

यह रिपोर्ट फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) के सालाना अधिवेशन से एक हफ्ते पहले जारी की गई है। जिसमें पाकिस्तान की ‘ग्रे लिस्ट’ की स्थिति पर फैसला होना है। बैठक में इस पर भी निर्णय होगा कि पाकिस्तान को ‘ब्लैकलिस्ट’ करने की दिशा में कोई ठोस कारण हैं या नहीं।

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