Afghanistan में पिछले कुछ वक़्त से America ने तालिबान के खिलाफ अपनी कार्यवाही को कम कर दिया है। जिसकी वजह से तालिबानी अब पूरे Afghanistan में तेजी से पांव पसार रहे हैं और उनकी मजबूत होती स्थिति वहां की सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। Afghanistan के 325 जिलों में से तालिबान का फिलहाल 76 जिलों पर प्रभाव है। जबकि 127 जिलों पर सरकारी सेना का प्रभाव है जो धीरे-धीरे कमजोर होता जा रहा है। 2001 के बाद से ही तालिबानी Afghanistan में मजबूत हैं। अब अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद Afghanistan में एक बार फिर से गृह युद्ध देखने की संभावना है। हालांकि तालिबानी पहले से ही इसमें अपनी जीत मान कर चल रहा है।

America ने फैसला कर लिया था कि वह Afghanistan से अलकायदा को पूरी तरह से उखाड़ फेंकेगा। लेकिन क्या वह पिछले दो दशकों में कुछ ऐसा कर पाया। जवाब सबके सामने है, अब कैसे धीरे-धीरे फिर से तालिबानी Afghanistan की सरकार पर हावी होते जा रहे हैं। पिछले दिनों America के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने घोषणा की, कि 11 सितंबर तक Afghanistan से सभी अमेरिकी सैनिकों को वापस बुला लिया जाएगा। इसके साथ जो बाइडेन ने कहा कि Afghanistan में जो नाटो देशों के तकरीबन 7000 सैनिक हैं वह भी अपने अपने देशों को वापस लौट जाएंगे। अब Afghanistan में अमेरिकी सैनिकों की सिर्फ एक टुकड़ी ही रहेगी जिसका मकसद होगा वहां अमेरिकी दूतावास की सुरक्षा करना। अमेरिकी सैनिक लगभग 20 वर्षों तक Afghanistan में रहे।

America को इन बीस सालों में तालिबानियों से लड़ाई लड़ते वक्त हर तरह से बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। इस लड़ाई ने तकरीबन 2300 अमेरिकी नागरिकों की जान ले ली और 20,000 से ज्यादा लोगों को घायल किया। हालांकि Afghanistan और तालिबान का नुकसान भी कुछ कम नहीं हुआ। उसके लगभग 60,000 लड़ाके मारे गए और तकरीबन 1 लाख से ज्यादा नागरिकों की भी मौत हुई। लेकिन इन 20 सालों की लड़ाई को अब बिना किसी फैसले के बीच में ही छोड़ा जा रहा है। America के जाते ही तालिबानी चरमपंथियों में खुशी की लहर है, वह अपनी जीत का जश्न मना रहे हैं।

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