सरकार-किसान के बीच विवाद बरकरार

हर साल पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन पर ‘राष्ट्रीय किसान दिवस’ मनाया जाता है। इस साल किसान आंदोलन के बीच ‘राष्ट्रीय किसान दिवस’ मनाया जा रहा है। केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ 28 दिनों से लगातार किसान आंदोलन कर रहे हैं। केंद्र सरकार का कहना है कि कृषि कानूनों से किसानों को लाभ होगा इससे बिचौलिए खत्म होंगे और किसानों की आय में इजाफा होगा, तो वहीं किसानों का कहना है कि इन कानूनों से उन्हें कोई लाभ नहीं होगा, इसीलिए किसान तीनों कानूनों को खत्म करने की मांग पर अड़े हैं। इसी बीच बुधवार को पूरे देश में ‘राष्ट्रीय किसान दिवस’ मनाया जा रहा है।

चौधरी चरण सिंह के कारण देश में जमींदारी प्रथा खत्म हुई थी। राष्‍ट्रीय किसान दिवस को मनाने की शुरुआत 2001 से हुई थी। चौधरी चरण सिंह द्वारा तैयार किया गया जमींदारी उन्मूलन विधेयक राज्य के कल्याणकारी सिद्धांत पर आधारित था। इसके कारण ही उत्तर प्रदेश में एक जुलाई 1952 को जमींदारी प्रथा खत्‍म हुई थी और गरीबों को उनका अधिकार मिला था। तभी से 23 दिसंबर को ‘राष्ट्रीय किसान दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

कृषि कानूनों पर सरकार और किसान संगठनों के बीच विवाद खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। सरकार लगातार किसानों को मनाने का प्रयास कर रही है लेकिन किसान कृषि कानूनों को रद्द करने के अलावा और किसी भी चीज पर राजी नहीं हैं।

एक केंद्रीय मंत्री के मुताबिक किसान संगठनों और सरकार के बीच बातचीत की संभावना नहीं बन रही है। सरकार न तो कानून वापस लेने के लिए राजी हो रही है और ना ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी देगी। जबकि आंदोलनरत किसान संगठनों की आंदोलन को लेकर मुख्य मांगें ही यही हैं। तो जाहिर है कि समाधान निकालने के लिए दोनों पक्षों में से किसी एक को अपने रुख में नरमी लानी होगी। फिलहाल अभी इसके कोई भी आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं।

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