क्या खत्म होगा किसानों का आंदोलन?

किसानों का कृषि बिल के विरोध में आंदोलन पंजाब से बढ़कर हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान समेत अन्य राज्यों में पहुंच गया है। किसान कानून खत्म करने के अलावा किसी और बात पर किसान मानने को तैयार नहीं हैं। किसानों ने कहा था कि वो 6 महीनें का राशन भी लेकर आए हैं, ऐसे में सरकार की मुसीबते बढ़ती जा रही हैं। किसान आंदोलन का असर 2022 के विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है।

किसान आंदोलन की वजह से पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों का सामना करना पड़ रहा है। किसान आंदोलन के चलते हर रोज करीब 3500 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। तीनों राज्यों के कई उद्योग खेती-किसानी पर निर्भर हैं। कोरोना के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान के बाद कृषि क्षेत्र से ही उम्मीद है। लेकिन चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के कारण रोड-हाईवे और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े बजट को खर्च करने की सरकार की प्रतिबद्धता पूरी होने में बाधा आ रही है।

वहीं किसान आंदोलन के कारण पंजाब में सब्जी उत्पादक किसानों के भी बुरे हाल हैं। किसान आंदोलन के कारण सब्जी उत्पादक किसान अपने उत्पाद मंडी तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं और कौड़ियों के दाम पर सब्जी बेचने को मजबूर हो गए हैं। पंजाब में सबसे अधिक सब्जी का उत्पादन संगरूर जिले के मालेरकोटला क्षेत्र में होता है। लेकिन आंदोलन के कारण यहां किसानों की कमर टूट गई है। सब्जी उत्पादकों की कमाई तो दूर की बात है, उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है।

किसानों ने 21 दिसम्बर को भूख हड़ताल का ऐलान किया है साथ ही 27 दिसम्बर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात में थाली पीटने को कहा है। वहीं, किसानों के इस ऐलान को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बार फिर किसानों को बातचीत का न्योता भेजा है और किसान यूनियनों से तारीख तय करने को कहा है। अब देखना ये है कि क्या किसान मानकर आंदोलन खत्म करेंगे या सरकार को ही पीछे हटना पड़ेगा?

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