नया साल नजदीक है लेकिन इस बार नए साल के मौके पर पहले की तरह जश्न देखने को नहीं मिलेगा। दरअसल साल 2020 कोरोना के साये में गुजरा। कोरोना के कारण इस साल आर्थिक गतिविधियों से लेकर शैक्षणिक गतिविधियां, खेलकूद सबकुछ प्रभावित नजर आया। देश ने लॉकडाउन भी झेला। जिंदगी की तस्वीर कुछ यूं बदली की कोरोना से बचने के लिए अब लोग मास्क पहने नजर आते हैं। लेकिन अब नया साल आने वाला है। दुआ तो लोग यही कर रहे हैं कि साल 2020 के साथ कोरोना काल भी खत्म हो जाए लेकिन कोरोना को खत्म होने में अभी वक्त लगेगा।

कहीं नए साल पर बढ़ ना जाए कोरोना मुसीबत

नए साल के जश्न के मौके पर हर साल लोगों की भीड़ उमड़ती है। इसलिए इस बार कोरोनाकाल के बीच नए साल के जश्न के चक्कर में अगर लोग बड़ी तादाद में इकट्ठा हुए तो दिक्कतें बढ़ सकती हैं। इसलिए जमीनी स्तर पर इंतजामात चाक चौबंद होने की जरूरत है। क्योंकि अगर नए साल के जश्न के साथ कोरोना के केस बढ़े तो दिक्कतें बढ़ सकती हैं। प्रशासन की जिम्मेदारी तो नए साल के मौके पर बढ़ ही जाएगी लेकिन साथ ही लोगों को भी एहतियात बरतने की जरूरत है

जिला प्रशासन की भूमिका रहेगी अहम

कोरोना को लेकर सरकार ने गाइडलाइंस जरूर जारी की हैं लेकिन अगर नए साल के मौके पर कोरोना महामारी को फैलने से रोकना है तो जिला प्रशासन की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है। यूं तो हर साल नए साल के मौके पर जिलों की पुलिस हुड़दंगबाजों और शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के मद्देनजर अतिरिक्त सतर्कता बरतती है लेकिन इस साल कोरोना महामारी के मद्देनजर जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है

उम्मीद तो की जा रही है कि नए साल के मद्देनजर लोगों की भीड़ ना जुटे इसके लिए राज्य सरकारें कड़े कदम उठा सकती हैं। अब देखना दिलचस्प होगा की राज्य सरकारें क्या कड़े कदम उठाती हैं। साथ ही ये भी देखने वाली बात होगी की नए साल के मौके पर लोग कितनी समझदारी दिखाते हैं।

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