चिट्ठियों से बनेगी सरकार और किसानों के बीच बात?

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चिट्ठियों का दौर जारी, बातचीत कब?

किसानों और सरकार के बीच चल रही जद्दोजहद को 1 महीना होने को है। कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है लेकिन किसान अभी भी दिल्ली बॉर्डर पर डटे हुए हैं। कुछ किसान संगठन जरूर सरकार के समर्थन में हैं लेकिन अभी सभी किसान पूरी तरह से नहीं माने हैं और सरकार से तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इस बीच सरकार भी किसानों को मनाने के लिए तमाम कोशिशें करती नजर आ रही है। लेकिन फिलहाल सरकार और किसानों के बीच चिट्ठियों का सिलसिला चल रहा है। और अब सरकार ने एक बार फिर किसानों को चिट्ठी लिखी है

सरकार की इस चिट्ठी में क्या खास है? 

सरकार और किसानों के बीच डेडलॉक की स्थिति बनी हुई है, जिसका टूटना बेहद जरूरी है। सरकार भी किसानों को बातचीत के लिए आमंत्रित कर रही है। किसानों से कह रही है कि सरकार किसानों के सभी मुद्दों पर तर्कपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्ध है.. सरकार कह रही है कि नए कृषि कानूनों का एमएसपी से कोई मतलब नहीं है। इतना ही नहीं सरकार ने एमएसपी को लेकर किसी भी तरह की नई मांग को लेकर भी आपत्ति जताई है

किसान क्या चाहते हैं?

किसान अपनी जिद्द पर अड़े हैं. पहले भी कई बार सरकार के लिखित संशोधनों को नकार चुके हैं. और अब सरकार ने जब दोबारा बातचीत की पहल की है तो किसान एक बार फिर सरकार के निमंत्रण पर मंथन करेंगे। किसानों के मंथन के बाद ही पता चल पाएगा कि किसान सरकार के निमंत्रण के बाद अगला कदम क्या उठाएंगे

कानून वापस लेने की मांग पर अड़े किसान

किसान पहले भी कह चुके हैं कि जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती तब तक बातचीत नहीं होगी। लेकिन फिलहाल बातचीत होनी जरूरी है और बातचीत तभी संभव है जब किसानों का रूख पहले से नरम पड़ेगा। लेकिन फिलहाल किसानों के तेवर देखकर बिल्कुल भी नहीं लग रहा कि किसान अपने रूख में नरमी बरतेंगे क्योंकि किसान कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन को धार देने की तैयारी में जुटे हैं।

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