गैर मुस्लिम विद्यार्थियों का पहले नहीं हो सकता था दाखिला

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को 100 साल पूरे हो गए हैं। AMU का इतिहास काफी दिलचस्प है। इसका नाम भी पहले अलग था और गैर मुस्लिम विद्यार्थियों का पहले दाखिला भी नहीं हो सकता था। बाद में जब नाम बदला तो एडमिशन के नियम भी बदलें और इस संस्थान से तमाम हिंदू साहित्यकार और महान हस्तियां भी पढ़कर निकलीं।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना साल 1875 में सर सैयद अहमद खान ने की थी। उस समय पर प्राइवेट यूनिवर्सिटी बनाने की परमिशन नहीं मिलती थी, इसीलिए पहले इसे मदरसे के तौर पर स्थापित किया गया। ये कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की तर्ज पर बनाया गया था। ब्रिटिश राज के समय बनाया गया ये पहला शिक्षण संस्थान था।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का नाम  पहले मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल था। मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना 1877 में सर सैयद अहमद खान ने की थी। इसे भारतीय विधान परिषद के एक अधिनियम द्वारा वर्ष 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में परिवर्तित कर दिया गया। आज विश्वविद्यालय का परिसर उत्तर प्रदेश के शहर अलीगढ़ में 467.6 हेक्टेयर भूमि में फैला है। मुख्य परिसर के अलावा, एएमयू के मलप्पुरम (केरल), मुर्शिदाबाद-जंगीपुर (पश्चिम बंगाल) और किशनगंज (बिहार) में तीन ऑफ-कैम्पस केंद्र भी हैं।

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