आज किसान दिवस है लेकिन विडंबना देखिए किसान दिवस के दिन किसान सड़कों पर है. सवाल ये उठता है कि क्या सचमुच तीनों कृषि कानून किसानों के हित में हैं और क्या विपक्ष किसानों को बरगलाने का काम कर रहा है. और अगर कृषि कानून में कुछ बिंदुओं से किसानों को परेशानियां भी हैं तो फिर सरकार संशोधन की बात कह रही है लेकिन फिर किसान इतना डरा हुआ क्यों है। सवाल कई सारे हैं और किसान आंदोलन के मुद्दे पर बातचीत के नाम पर गेंद कभी किसानों के पाले में डाली जा रही है तो कभी सरकार के पाले में। समाधान कब निकलेगा और बातचीत कब होगी ये सवाल अभी भी बना हुआ है। अब सरकार ने किसानों को चिट्ठी लिखी तो किसान भी सरकार को लिखित जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन चिट्ठियों का ये सिलसिला आखिर कब तक चलता रहेगा। खैर फिलहाल सरकार किसानों को मनाने  के लिए तमाम कवायदें कर रही है। कई किसान संगठन सरकार के साथ भी आ गए हैं लेकिन कई किसान संगठन अभी भी दिल्ली बॉर्डर पर डटे हुए हैं.

बातचीत है बेहद जरूरी

हां, ये सच है कि किसानों और सरकार के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है और बातचीत से बात बनती नहीं दिखी। लेकिन एक सच ये भी है कि जब तक बातचीत नहीं होगी तब तक बात बनेगी भी नहीं। सरकार ने एक बार फिर किसानों को बातचीत का निमंत्रण दिया है। बात कब तक होती है नहीं पता लेकिन बात हो ये बेहद जरूरी है। क्योंकि तभी किसान और सरकार एक ठोस समाधान तक पहुंच सकते हैं।

बातचीत से हो समाधान, हठधर्मिता से बिगड़ेगी बात!

किसान तीनों कानून वापस लेने की मांग पर अड़े हैं वहीं सरकार कानूनों में संशोधन की बात कह रही है। हठधर्मिता किसानों और सरकार के बीच होने वाली बातचीत के आड़े आ रही है। किसान सरकार को अपनी समस्याएं बता चुके हैं सरकार समाधान करने को राजी है। ऐसे में उम्मीद तो यही करेंगे की जल्द ही बातचीत हो और किसान और सरकार बीच का रास्ता निकालकर किसी ठोस नतीजे पर पहुंचे।

प्रधानमंत्री भी कर रहे हैं किसानों से संवाद

कार्यक्रम कोई भी हो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधनों में आजकल किसानों का जिक्र जरूर आता है। देव दीपावली के मौके पर भी पीएम मोदी के भाषण में किसान छाए रहे थे इसके अलावा भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार किसानों के साथ संवाद करके कृषि कानून के फायदे भी गिनवा रहे हैं और अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 दिसंबर को एक बार फिर किसानों के साथ संवाद करेंगे। देखना दिलचस्प होगा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस दौरान ऐसा क्या खास कहते हैं कि किसान मान जाएं।

खैर वजह चाहे जो भी हो, किसानों का यूं सड़कों पर बैठना दिल को कचोटता जरूर है। अन्नदाता अगर सड़कों पर बैठेगा तो एक दिन पूरे देश को भूखे पेट सोना पड़ेगा। ऐसे में उम्मीद तो यही करेंगे कि सरकार और किसानों के बीच चल रही ये तकरार जल्द खत्म होगी और किसान खुशी-खुशी अपने घरों को लौट जाएंगे

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