तब तक दिल्ली की सीमाओं को घर मानकर डटे रहेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के तीनों कृषि कानूनों पर रोक लगा दी है, साथ ही किसानों और सरकार के बीच चल रहे विवाद को समझने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी गठित की है, जो सभी बिंदुओं को समझकर उसके बाद रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंगलवार को सुनाए गए इस फैसले से किसान नाराज हैं, वो इस फैसले को मानने को तैयार नहीं हैं। किसानों का कहना है कि मौजूदा केंद्र सरकार अपने मन का करती है, वो कोर्ट के फैसले को नहीं मानती। किसानों ने कहा कि जब तक कृषि कानूनों को वापस नहीं ले लिया जाता तब तक वह दिल्ली की सीमाओं को घर मानकर यही पर अड़े रहेंगे।

गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार किसी कोर्ट के फैसले को नहीं मानती, वह अपनी मर्जी से सब कुछ करती है। उन्हें पूरा यकीन है कि सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला भी केंद्र सरकार नहीं मानेगी। कोर्ट के इस फैसले के बाद भी किसान दिल्ली से बाहर नहीं जाएंगे। किसानों का कहना है कि जबतक कानून रद्द नहीं हो जाता और एमएसपी पर कानून नहीं बन जाता तब तक वह यहां पर ऐसे ही डटे रहेंगे।

कृषि कानूनों पर केंद्र को ‘सुप्रीम’ फटकार

किसानों ने कहा कि अब तो वह अपने खेतों की नहीं बल्कि अपनी नस्लों को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। आखिर कब तक किसानों का शोषण होता रहेगा। किसान हाड़तोड़ मेहनत कर अन्न पैदा करे और मुनाफा बिचौलिये कमाएं। अब ऐसा नहीं होगा, किसान इस बार अपना हक वापस लेकर ही दिल्ली से जाएंगे।

वहीं किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि देश के किसान सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निराश हैं। कोर्ट ने जिन अशोक गुलाटी की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर किसानों से बातचीत करने को कहा है, उन्होंने कृषि कानूनों को लागू करने की सिफारिश की थी। इस कमेटी में शामिल सभी सदस्य खुली बाजार व्यवस्था व कानून के समर्थक हैं। किसानों की मांग कानून को रद्द कराने व एमएसपी को कानून बनाने की है। जब तक यह सारी मांगे पूरी नहीं होगी तब तक आंदोलन यूं ही जारी रहेगा।

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