Hindi Diwas :आज ही के दिन संविधान सभा ने निर्णय लिया कि Hindi ही भारत की राजभाषा होगी

0
904

आज Hindi Diwas है। हिंदी को राजभाषा का दर्जा 14 सितंबर, 1949 के दिन मिला था। तब से हर साल यह दिन ‘Hindi Diwas’ के तौर पर मनाया जाता है। हिंदी हमारी राजभाषा है,और लिपि देवनागरी; इसका फैसला संविधान सभा ने 14 सितंबर को ही किया था।

Hindi भारतीय गणराज की राजकीय और मध्य भारतीय- आर्य भाषा है। 2001 की जनगणना के अनुसार, लगभग 25.79 करोड़ भारतीय Hindi का उपयोग मातृभाषा के रूप में करते हैं, जबकि लगभग 42.20 करोड़ लोग इसकी 50 से अधिक बोलियों में से एक इस्तेमाल करते हैं।

1998 के पूर्व, मातृभाषियों की संख्या की दृष्टि से विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं के जो आंकड़े मिलते थे, उनमें Hindi को तीसरा स्थान दिया जाता था।

Hindi की प्रमुख बोलियों में अवधी, भोजपुरी, ब्रजभाषा, छत्तीसगढ़ी, गढ़वाली, हरियाणवी, कुमांऊनी, मागधी और मारवाड़ी भाषा शामिल हैं।

जानें, कैसे Hindi बनीं राष्ट्रभाषा

साल 1947 में जब अंग्रेजो से भारत को मुक्ति मिली तो उसके सामने भाषा को लेकर सबसे बड़ा प्रश्न था। क्योंकि भारत में सैकड़ों भाषाएं और बोलियां बोली जाती है। 6 दिसंबर 1946 में आजाद भारत का संविधान तैयार करने के लिए संविधान का गठन हुआ। संविधान सभा ने अपना 26 नवंबर 1949 को संविधान के अंतिम प्रारूप को मंजूरी दे दी। आजाद भारत का अपना संविधान 26 जनवरी 1950 से पूरे देश में लागू हुआ।

लेकिन भारत की कौन सी राष्ट्रभाषा चुनी जाएगी ये मुद्दा काफी अहम था। काफी सोच विचार के बाद Hindi और अंग्रेजी को नए राष्ट्र की भाषा चुना गया। संविधान सभा ने देवनागरी लिपी में लिखी हिन्दी को अंग्रजों के साथ राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया था। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से निर्णय लिया कि Hindi ही भारत की राजभाषा होगी।

देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि इस दिन के महत्व को देखते हुए हर साल 14 सितंबर को Hindi Diwas मनाया जाए। बता दें पहला Hindi Diwas 14 सितंबर 1953 में मनाया गया था।

अंग्रेजी भाषा को लेकर हुआ विरोध

14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से निर्णय लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी। अंग्रेजी भाषा को हटाए जाने की खबर पर देश के कुछ हिस्सों में विरोध प्रर्दशन शुरू हो गया था। तमिलनाडु में जनवरी 1965 में भाषा विवाद को लेकर दंगे हुए थे।

साल 1918 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा था। इसे गांधी जी ने जनमानस की भाषा भी कहा था।

यह भी पढ़ें – मदरसों के सर्वे पर बोले Asaduddin Owaisi,- मुसलमानों को टारगेट करने का प्रयास

ABSTARNEWS के ऐप को डाउनलोड कर सकते हैं. हमें फ़ेसबुकट्विटरइंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो कर सकते है