बिहार में Coronavirus के ख़तरे के बीच कुछ और ही खिचड़ी पक रही है जिसकी हांडी चाचा पशुपति कुमार पारस ने हथिया ली है। लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) में चाचा पशुपति कुमार पारस और भतीजा Chirag Paswan के बीच अध्यक्षता की दावेदारी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच सकता है। इस बात की घोषणा स्वयं Chirag Paswan ने ही की है।

Chirag Paswan ने अपने चाचा पशुपति कुमार पारस के पार्टी अध्यक्ष के चुनाव को खारिज करते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया है और कहा है कि लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा किया जाता है जिसमें लगभग 75 सदस्य होते हैं। जबकि गुरुवार को पटना में हुई लोजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में केवल 9 सदस्य उपस्थित थे। निलंबित सदस्यों ने मेरे चाचा को अध्यक्ष चुना है, जो अवैध है।

चिराग ने यह भी कहा कि मेरे पास पार्टी के प्रदेश अध्यक्षों के शपथ पत्र हैं, जिन्होंने मेरे नेतृत्व पर भरोसा जताया है। मैंने चुनाव आयोग को सूचित किया है कि ये 5 सांसद अब लोजपा के नहीं, बल्कि निर्दलीय सांसद हैं। मुझे विश्वास है कि लोजपा संविधान के मद्देनजर चुनाव आयोग और लोकसभा अध्यक्ष उचित निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी मेरे पिता द्वारा बनाई गई थी और मैं इसे इस तरह टूटते नहीं देख सकता। एक लंबी लड़ाई के लिए तैयार हूं और जरूरत पड़ी तो मैं सुप्रीम कोर्ट का रुख करूंगा।

लोक जनशक्ति पार्टी में राजनीतिक विवाद को लेकर पूर्व सांसद अरुण कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। अरुण कुमार ने पीएम मोदी से Chirag Paswan की राजनीतिक हत्या रोकने की गुहार लगाते हुए अपने पत्र में प्रधानमंत्री मोदी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का वह व्यवहार दिलाने की कोशिश की है जिसमें उन्होंने पीएम मोदी की उपस्थिति के कारण भाजपा नेताओं के लिए आोयजित भोज रद्द कर दिया था।

अरुण कुमार ने अपने पत्र में लिखा है कि नीतीश कुमार ने उन्हें राजनीतिक अछूत बनाते हुए उनके सामने से ही थाली खींची थी। अरुण कुमार ने पत्र में यह भी कहा है कि Chirag Paswan ने बतौर पीएम उम्मीदवार उनका समर्थन किया था, इसलिए उनकी राजनीतिक हत्या को पीएम मूकदर्शक बनकर नहीं देखें।

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