अफवाह ने पकड़ी रफ्तार…पिता को लेना पड़ा कानून का सहारा

भारत में हर दूसरे सेकंड, एक महिला साइबर अपराधों का शिकार होती है और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अब एक नया मंच है, जहां हर पल एक महिला की गरिमा, गोपनीयता और सुरक्षा को चुनौती दी जा रही है। ट्रोलिंग, गाली-गलौज, धमकी देना, घूरना, बर्बरता, बदनाम करना, पीछा करना, बदला लेना और अश्लील बातें करना जैसे साइबर अपराध दिनों दिन बढ़ते रहे हैं। आज हम महिला और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कानून की बात इसलिए भी कर रहे हैं कि हाल में एक बच्ची की हत्या की खबर आई और सोशल मीडिया पर उसे ना सिर्फ तोड़-मरोड़कर पेश किया गया बल्कि इसे जातिय रंग देकर तनाव पैदा करने की भी कोशिश की गई।

jyoti murder case

दरअसल सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ाई गई कि लॉकडाउन के दौरान अपने बीमार पिता को गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा अपने गांव ले जाने वाली साइकिल गर्ल ज्योति पासवान के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई। हालांकि सच्चाई ये है कि ज्योति जिंदा है और वो ज्योति पासवान कोई और थी जिसकी करंट लगने से मौत हो गई लेकिन अफवाह थी तो रफ्तार तो पकड़ना ही था। सो इस खबर ने भी रफ्तार पकड़ ली फिर क्या था मामले ने ऐसा तूल पकड़ा कि ज्योति के घरवाले परेशान हो गए। नौबत यहां तक आ गई कि उन्हें थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज करानी पड़ गई।

jyoti murder case

दुष्कर्म या हत्या, या फिर दुष्कर्म के बाद हत्या, या सिर्फ एक आरोप

ख़बर ये भी है कि इससे जातिय तनाव भी बढ़ सकता था। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दरभंगा के एसएसपी को खुद पूरे मामले पर प्रेस कांफ्रेंस करना परा एसएसपी बाबू राम ने साफ़ सब्दो में कहा कि साईकिल गर्ल ज्योति के साथ कोई घटना नहीं हुई है न ही उसकी हत्या हुई है ज्योति बिलकुल ठीक है और अपने परिवार के साथ है। उन्होंने कहा एक जुलाई को जिस बच्ची का शव मिला था उसका भी नाम ज्योति ही था ऐसे में कुछ लोगो ने तथ्य को गलत तरीके से तोड़- जोड़ मृतक ज्योति को साईकिल गर्ल ज्योति बना दिया और सोशल मीडिया पर वायरल कर जातिये रंग दे दिया।

 

बहरहाल पुलिस ने गलत खबर चलाने वाले पोर्टल के खिलाफ सबूत जुटाने और कानूनी कार्रवाई में जुट गई है, लेकिन सवाल यहां ये है कि सोशल मीडिया पर इस तरह की अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कोई सख्त कानून क्यों नहीं बनाए जाते।  ऐसा नहीं की महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कानून नहीं बने लेकिन महिलाओं के लिए जो कानून बनाए गए हैं उनमें शारीरिक रुप से प्रताड़ित महिलाओं के लिए कानून तो ज्यादा बनाए गए हैं लेकिन मानसिक रुप से प्रताड़ित महिलाओं के लिए ज्यादा कानून नहीं बनाए गए हैं। आए दिन हम किसी ना किसी तरह की अफवाहें सोशल मीडिया के जरीए सुनते और देखते रहते हैं, कई बार ये हिंसा का रुप भी लेकर लोगों पर हावी हो जाती है।इस पर लगाम बेहद जरुरी है।

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