आठवें दौर की बातचीत होगी आठ जनवरी को

केंद्र के कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए Delhi की सीमाओं पर डटे किसानों संग सरकार की सातवें दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही। किसान लगातार कानून रद्द करवाने पर अड़े रहे और सरकार लगातार फायदें गिनाती रही, और तीनों कृषि कानूनों में संशोधन की बात करती रही। अब किसान और सरकार की अगले यानी आठवें दौर की वार्ता आठ January को होगी।

तीनों कानूनों को लेकर विवाद सुलझाने के लिए सरकार ने किसानों के सामने संयुक्त समिति गठित करने का प्रस्ताव भी रखा, लेकिन किसान संगठनों ने इसे भी खारिज कर दिया। यहां तक कि किसानों ने सरकार का खाना भी नहीं खाया, सरकार और किसान दोनों ने अलग अलग ही खाना खाया।

विज्ञान भवन में करीब चार घंटे तक किसानों और सरकार के बीच बातचीत चली। इस बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री Narendra Singh Tomar, रेलवे, वाणिज्य व खाद्य मंत्री Piyush Goyal और केंद्रीय वाणिज्य राज्यमंत्री और पंजाब से सांसद Som Prakash मौजूद थे, साथ ही 40 किसान यूनियनों के प्रतिनिधि भी बैठक में मौजूद थे।

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बैठक की शुरुआत में प्रदर्शन की वजह से अपनी जान गंवाने वाले किसानों को दो मिनट का मौन रखके श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद किसान संगठनों ने सरकार के समक्ष तीनों कानूनों से जुड़े प्रावधानों से संबंधित उनकी आपत्तियों पर बिंदुवार चर्चा का प्रस्ताव रखा, लेकिन किसान चर्चा के वक्त कानून वापसी की लगातार मांग करते रहे। बैठक में कुछ देर के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने पर भी चर्चा हुई।

कानून वापसी मामले में बात नहीं बनी तो, सरकार ने फिर से एमएसपी पर बातचीत का प्रस्ताव रखा। इस पर भी किसान संगठनों ने बात नहीं मानी और कहा, अब इस मुद्दे पर भी आठ जनवरी की ही बैठक में बातचीत होगी। आपको बता दें कि हाल ही में किसानों ने कहा था कि अगर बैठक में बात नहीं बनी, तो छह जनवरी को कुंडली और टीकरी बार्डर से ट्रैक्टर यात्रा शुरू की जाएगी।

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