भारत की आजादी के बाद के 75 सालों में टेलीकॉम क्षेत्र में भारत ने जो मुकाम हासिल किया है उस पर 130 करोड़ देशवासियों को फक्र है। पहले टेलीग्राफ आया और फिर लैंड लाइन और अब मोबाइल ने तो एक नई दुनिया, वर्चुअल दुनिया बसा दी है, जिसमें हम सब सुबह शाम खोए हुए हैं। यानी ‘तार’ अब देश, दुनिया और दिलों के तार जोड़ रहा है। वहीं कोरोना के इस दौर में घर वालों और दोस्तों से वीडियो कॉलिंग हो या ऑनलाइन एजुकेशन और वर्क फ्रॉम होम को बेहद आसान बनाना हो, इसमें देश के टेलीकॉम सेक्टर का बेहद बड़ा और बुनियादी योगदान है।

आइये जानते है आने वाले पांच साल में यह सेक्टर कैसे बढ़ेगा।

सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) कहते हैं कि 75 साल में से बीते 25 साल टेलीकॉम सेक्टर के लिए काफी अहम रहा है। इस दौरान टेलीकॉम सेक्टर ने काफी प्रगति की। टेलीकॉम का स्तंभ इतना मजबूत है कि हर सब्सक्राइबर को मुफ्त कॉलिंग मिल रहा। डाटा दुनिया में सबसे सस्ता है और रह व्यक्ति के हाथ में मोबाइल फोन है जिससे वो अपना व्यवसाय चलाता है। डिजिटल क्रांति जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है उसे टेलीकॉम क्षेत्र ही पूरा कर रहा है।

जल्द ही देश में 5जी सेवा शुरू हो जाएगी जिसकी फिलहाल टेस्टिंग की जा रही है। जिसके पूरे देश में लागू होने के बाद मोबाइल टेलीफोनी की दुनिया बदल जाएगी। 4जी इंटरनेट की स्पीड जब इतनी शानदार है तो जरा सोचिए 5जी के बाद इंटरनेट की स्पीड क्या होगी। एक अनुमान के मुताबिक 5जी की स्पीड 4जी से 10 गुना ज्यादा है। 4जी से 5जी की तरफ जाने के लिये हम अग्रसर है ये अहम समय हैं, अभी तक हम टेलीकॉम को कम्युनिकेशन का जरिया मानते थे लेकिन ये इससे आगे चला जाएगा। इससे व्यवसाय खुद चलेंगे, ऑटोमेशन बढ़ जाएगा। अभी तक जो चीजें बड़े शहरों तक सीमित है गांवों तक पहुंचेगी जिसमें ई-मेडिसीन है, शिक्षा का क्षेत्र, कृषि क्षेत्र को फायदा होगा। वहीं अब बात सेटेलाइट इंटरनेट सेवा की हो रही है और वो दिन दूर नहीं जब देश में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा भी शुरू हो जाए जिसकी तरफ धीरे ही सही लेकिन टेलीकॉम कंपनियों ने कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं।

बढ़ेगा डिजिटाइजेशन और टेलीकॉम

5जी सेवा के लॉन्च होने से डिजिटल क्रांति को नया आयाम मिलेगा। वहीं इंटरनेट ऑफ थिंग्स और औद्योगिक आईओटी और रोबोटिक्स की तकनीक भी आगे बढ़ेगी। इससे देश की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। ई गवर्नेंस का विस्तार होगा।
राष्ट्र निर्माण, डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देने के साथ ही टेलीकॉम सेक्टर भारी उथलपुथल के दौर से गुजर रहा है। फिलहाल निजी क्षेत्र में 3 टेलीकॉम ऑपरेटर हैं। जिसमें एक वोडाफोन आइडिया वित्तीय सकंट के दौर से गुजर रहा। सरकार की कोशिश है कि देश में हर हाल में तीन निजी मोबाइल ऑपरेटर रहे जिससे टैरिफ महंगा ना हो, क्योंकि ये आशंका जाहिर की जी रही है कि अगर कोई मोबाइल ऑपरेटर वित्तीय संकट के चलते अपनी सेवा देना बंद कर देता है तो देश में दो ही ऑपरेटर बचेंगे जिसके बाद कॉल दरों के साथ डाटा चार्ज महंगा हो सकता है इससे पीएम मोदी के डिजिटल इंडिया के अभियान को भी झटका लग सकता है।

माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में सरकार टेलीकॉम कंपनियों के लिए राहत पैकेज का ऐलान कर सकती है। मोबाइल फोन सेवा की जब शुरुआत हुई तब कॉल दरें काफी महंगी थी। आउटगोइंग के साथ इनकमिंग कॉल के लिये भी तब पैसा चुकाने पड़ते थे। मोबाइल हैंडसेट भी तब बेहद महंगा था। इसलिये शुरुआत में इसका विस्तार बहुत धीमी गति से हुआ। जिनके पास पैसे थे वहीं मोबाइल फोन रख सकते थे। लेकिन समय के साथ ज्यादा कंपनियों को मोबाइल सेवा देने के लिये लाइसेंस मिला तो प्रतिस्पर्धा के चलते कॉल दरें कम होती चली गई। सरकार और रेग्युलेटर ने इनकमिंग कॉल को फ्री कर दिया। आउटगोइंग कॉल बेहद सस्ता हो गया तो बाद में रोमिंग चार्जेज को भी खत्म कर दिया गया।

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