App डॉउनलोड करने से पहले ये जरूरी बातें जान लें

आधुनिकता के इस दौर में जमाना डिजिटल हो चुका है लेकिन डिजिटल जमाना अपने साथ कई परेशानियां भी लेकर आया है।जिंदगी जीने का तरीका आसान हुआ है लेकिन डिजिटलाइजेशन ऐसे कई खतरे भी साथ लाया है जिससे आपको जिंदगी भर की कमाई से हैकर्स के बस एक क्लिक से पलभर में हाथ धोना पड़ सकता है। साइबर सुरक्षा को लेकर मोदी सरकार भी एक्टिव नजर आ रही है। कई एप्स को बैन भी किया गया है। लेकिन कोई एप फेक है या नहीं इस बात की पहचान आप कैसे करेंगे। अपनी इस रिपोर्ट में हम आपको वो जरूरी बातें बनाएंगे जिनके जरिए आप फेक एप्स की पहचान कर सकते हैं और खतरनाक एप्स को डाउनलोड करने से बच सकते हैं।

कॉन्टैक्ट अड्रेस की पहचान जरूरी

अगर आप मोबाइल में कोई एप डाउनलोड करना चाहते हैं तो सबसे पहले ऐप डेवलपर्स का कॉन्टैक्ट अड्रेस चेक करना जरूरी है…अगर फेक एप्स होंगी तो उनके डेवलपर्स का ई-मेल अड्रेस जी-मेल या याहू से जुड़ा होता है..वहीं अगर आपको किसी ऐप में कोई कॉन्टैक्ट इन्फॉर्मेशन ना मिले तो उसे तो बिल्कुल भी डाउनलोड ना करें

ऐप डिस्क्रिप्शन

ऑरिजिनल ऐप्स का डिस्क्रिप्शन सही तरीके के साथ विस्तार से लिखा होता है। वहीं फेस ऐप्स से जुड़े डिस्क्रिप्शन अक्सर छोटे होते हैं और इनमें ढ़ेर सारी गलतियां होती है

वैरिफाइड बाई प्ले प्रोटेक्ट बैज

वेरिफाइड बाई प्ले प्रोटेक्ट बैज वाली ऐप्स को डाउनलोड करना सेफ होता है, इसलिए कोई भी ऐप डाउनलोड करने से पहले बैज पर जरूर ध्यान दें अगर ऐप प्ले प्रोटेक्ट बैज से वैरिफाइड नहीं है तो फिर ऐसी ऐप्स को डाउनलोड ना करने में ही समझदारी है

बैटरी और डेटा यूज

कई बार हमें जानकारी नहीं होती और हम फेक ऐप्स को डाउनलोड कर लेते हैं। दरअसल डेटा और बैटरी यूज के जरिए भी इन ऐप्स को पहचाना जा सकता है। क्योंकि फेक ऐप्स ज्यादा डेटा और बैजरी कन्ज्यूम करते हैं..अगर आपके फोन में भी कोई ऐसी ऐप है तो ऐसी ऐप को फौरन डिलीट करने में ही समझदारी है

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