मिशन गगनयान के तहत तीन लोगों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।

चंद्रयान -2 मिशन के बाद अब (इसरो) का पूरा ध्यान मिशन गगनयान 2022 पर हैं। ISRO के अध्यक्ष के।सिवान ने शनिवार को कहा कि चंद्रयान-2  लैंडर से संपर्क नहीं हो पा रहा है। आपको बता दें की भले ही लैंडर से संपर्क नहीं हो पा रहा है, पर ऑर्बिटर अभी भी काम कर रहा है। ऐसे में उनका कहना है कि अब इसरो अपना पूरा ध्यान अपने अगले मिशन की तरफ केंद्रित करेगा।

भारत दुनिया में ऐसा करने वाला चौथा देश होगा।

चंद्रयान 2 के बाद अब ISRO की निगाहें मिशन गगनयान पर

ISRO अध्यक्ष के.सिवान ने मंगलवार  को कहा कि, प्रस्तावित अंतरिक्ष मिशन गगनयान में तीन चालक दल के सदस्यों को 5 से 7 दिनों के लिए अंतरिक्ष में रहने के लिए मनुष्य को भेजेंगे। मिशन गगनयान भविष्य में वैश्विक अंतरिक्ष खोज कार्यक्रमों में भागीदारी के लिए सक्षम बनाएगा। भारत दुनिया में ऐसा करने वाला चौथा देश होगा। अपने मिशन में सफल होने के लिए कार्य करना है। अब तक, अमेरिका, रूस और चीन अंतरिक्ष में एक अंतरिक्ष यान को भेजने में कामयाब रहे हैं।

मिशन गगनयान के तहत तीन लोगों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। उनको कम से कम सात दिनों के लिए अंतरिक्ष में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। मंत्रिमंडल में गगनयान के लिए 10 हजार करोड़ की राशि को मंजूरी दे दी गई हैं। आपको बता दें कि इसमें टेक्नोलॉजी विकास लागत, विमान हार्डवेयर, विमान अधिग्रहण तत्वों की लागत भी शामिल हैं। इसरो ने इसे भेजने के लिए 2022 का लक्ष्य निर्धारित किया है। अंतरिक्ष के भीतर स्वायत्तता की ओर भारत सरकार के अनुसार एक बड़ा कदम होगा।

भारतीय वायु सेना और इसरो द्वारा संयुक्त रूप से क्रू का चयन आयोजित किया जाएगा।

चंद्रयान 2 के बाद अब ISRO की निगाहें मिशन गगनयान पर

ISRO अध्यक्ष के.सिवान का कहना है कि मिशन की शुरुआत के बाद 16 मिनट में कक्षा में पहुंच जाएगे।  जब क्रू पृथ्वी पर अपनी वापसी करेगा। तब उन्हें गुजरात तट के समीप अरब सागर, बंगाल की खाड़ी में या जमीन पर उतारा जा सकता है। सिवान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहां कि भारत में 75 वीं स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाने के छह महीने पहले इस मिशन को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया हैं। यह मिशन मैक -3 जीएसएलवी प्रक्षेपण यान की मदद करने के द्वारा पूरा कर लिया जाएगा।

पीएमओ के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, की यह भारत का पहला ऐसा मिशन होगा जो अन्य मानव मिशनों की तुलना में, यह मिशन सबसे सस्ता होगा । भारतीय वायु सेना और इसरो द्वारा संयुक्त रूप से क्रू का चयन आयोजित किया जाएगा। उसके बाद,  उन्हें दो से तीन साल के प्रशिक्षण के लिए रखा जाएगा।