यूपी के इस शहर में सीवर सफाई के लिए नही उतरेगा कोई सफाई कर्मचारी

ऐसा एक बार नही बल्कि कई बार देखा गया है कि सीवर सफाई के लिए मैनहोल में उतरने वाले सफाई कर्मचारी जहरीली गैस की वजह से मारे जाते हैं। सफाई कर्मचारियों के बचाव के लिए अब नए प्रयास किए जा रहे हैं। जिसके तहत प्राधिकरण ने रोबोट को उतारा है। प्राधिकरण सीईओ नरेंद्र भूषण ने शुक्रवार(7 अगस्त) को रोबोट से सीवर के सफाई कार्य की बटन दबा कर शुरुआत की।

हर साल न जानें कितने ही सफाई कर्मचारी मैनहोल में उतरकर कभी ज़िंदा वापिस नही लौटते लेकिन अब ऐसा नही होगा। अब मैनहोल की सफाई के दौरान किसी की जान नहीं जाएगी। दरअसल अब मैनहोल की सफाई रोबोट द्वारा की जाएगी। बता दें कि एक दिन में रोबोट पांच मैनहोल की सफाई करेगा। प्राधिकरण का दावा है कि दिल्ली एनसीआर में सीवर की रोबोट से सफाई कराने वाला ग्रेटर नोएडा पहला शहर है।

श्रम कानून में बदलाव से कंपनियों ने बदले तेवर, ओरिएंट क्राफ्ट…

अब ग्रेटर नोएडा में मजदूरों और सफाईकर्मियों को सीवर के दलदल में नहीं उतरना पड़ेगा। इससे पहले गुरुग्राम में भी सीवर साफ करने वाला रोबोट आ चुका है। बता दें कि इस रोबोट की कीमत करीब 40 लाख रुपये बताई गई है। हैदराबाद, केरल, असम और तमिलनाडु में इस तरह की रोबोटिक तकनीक पहले से ही उपल्ब्ध है। यूपी में यह पहला रोबोट सीवर क्लीनर है।

इस तरह होगी सफाई –

रोबोट के जरिए जमीन से 8 मीटर नीचे मैनहोल, स्लज और ब्लॉकेज की सफाई की जा सकेगी। इस रोबोट में एक स्वचालित कैमरा भी लगा हुआ है, जिससे बाहर बैठकर ही आसानी से मॉनिटरिंग की जा सकेगी। रोबोट से एक दिन में 10 मैनहोल की सफाई की जा सकेगी। रोबोट आने के बाद अब किसी भी कर्मचारी को सफाई के लिए मैनहोल में नहीं उतरना पड़ेगा। इस रोबोट तकनीक की मदद से एक दिन में पांच सफाईकर्मयों का काम लिया जा सकेगा। रोबट के जरिए सफाई के दौरान निकलने वाली गैस की जानकारी भी डैशबोर्ड पर देखी जा सकेगी।

जानें आंकड़े –

2011 की जनगणना में पाया गया कि भारत में मैनुअल स्कैवेंजिंग के 7.94 लाख मामले सामने आए हैं। वहीं 2017 के बाद से हर 5 दिन में सीवर साफ करने के दौरान एक मौत हो जाती है। सफाई कर्मचारियों के संगठन के अनुसार 2016 और 2018 के बीच दिल्ली में ही सीवर की सफाई के दौरान 429 मौतें हुईं हैं।

इस तरह होती है अभी तक सीवर की सफाई –

आपने भी देखा होगा कि अभी तक सीवर सफाई की जो व्यवस्था है उसमें मजदूर बिना किसी सेफ्टी किट के मैनहोल में घुसता है। उसकी कमर में रस्सी बंधी होती है। हाथ में बाल्टी और फावड़े होते हैं। मैनहोल में सड़े-गले पदार्थ होते हैं। इस वजह से अदर जहरीली गैस भी बन जाती है। अक्सर इन गैसों की वजह से ही मजदूरों के जान जाने की खबरें आती हैं। कई बार तो उनका शव निकालने गए मजदूर भी जहरीली गैस की चपेट में आ जाते हैं।

ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ नरेंद्र भूषण ने बताया कि अथॉरिटी ने सुपर सकर मशीन भी खरीदी हैं, जिसमें दो डंप टैंक भी हैं। इसमें 120 मीटर लंबे हौज पाइप लगी है जिससे लंबी दूरी तक की सफाई भी आसानी से की जा सकेगी। इस मशीन पर पर 1.20 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। फिलहाल, ग्रेटर नोएडा के लोग सीवर संबंधी कोई भी शिकायत कंट्रोल रूम के नंबर 8595810523 और 8595814470 पर दर्ज करवा सकते हैं।

ABSTARNEWS के ऐप को डाउनलोड कर सकते हैं. हमें फ़ेसबुकट्विटरइंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो कर सकते है