जब सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र में लहराया था तिरंगा

क्या आपने कभी ऐसे छद्म युद्ध के बारे में सुना है जो एक या दो महीने नहीं बल्कि पूरे 18 साल चली। अगर नहीं तो आपको बता दें कि ये लड़ाई और किसी के बीच नहीं बल्कि भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच लड़ा गया था। वो भी दुनिया के सबसे दुर्गम युद्ध क्षेत्र में जहां दुश्मन के साथ-साथ मौसम भी जान लेने पर आमादा है। हम बात कर रहे हैं सियाचिन के छद्म युद्ध की।

सियाचिन में पाकिस्तान की नापाक चाल

दरअसल सियाचिन में भारत की रणनीति कभी युद्ध करने की नहीं रही। साल 1972 में सियाचिन को लेकर समझौता भी हुआ था जिसमें साफ लिखा गया था कि सियाचिन का इलाका इंसानों के रहने लायक नहीं है। यही वजह है कि सियाचिन में भारत और पाकिस्तान की सीमाएं भी निर्धारित नहीं की गई थी। लेकिन सियाचिन कई मायनों में खास है और पाकिस्तान को ये बात बखूबी पता थी। फिर क्या था 80 के दशक में पाकिस्तान ने सियाचिन पर कब्जा जमाने के लिए रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया और सियाचिन पर कब्जा जमाने के लिए पाकिस्तान ने ऑपरेशन अबाबील चलाया। जिसके तहत पाकिस्तान देश विदेश के पर्वतारोही दलों को सियाचिन भेजने लगा। पाकिस्तान ने यूरोप के बर्फीले इलाकों में पहने जाने वाले खास कपड़ों और हथियारों का भी बड़ा ऑर्डर दिया था। पाकिस्तान के इरादों की भनक लगते ही भारत चौकन्ना हो गया और फिर पाकिस्तान के ऑपरेशन अबाबील के जवाब में भारत ने चलाया ऑपरेशन मेघदूत। ऐसा पहली बार था जब दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र में सीधे टकराव की नौबत आई थी।

मुश्किल चुनौती के बावजूद पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब

सियाचिन की लड़ाई भारत के लिए आसान नहीं थी। भारत के लिए सियाचिन में युद्ध पाकिस्तान से ज्यादा मुश्किल था क्योंकि भारत की तरफ से सियाचिन की खड़ी चढ़ाई थी जबकि भारत के मुकाबले पाकिस्तान के लिए ये ऊंचाई कम थी। सियाचिन की भौगौलिक बनावट पाकिस्तान के साथ थी। लेकिन भारतीय जवानों के हौंसले भला भौगौलिक बनावट के आगे कहां पस्त होने वाले थे। सियाचिन की सबसे ऊंची पहाड़ियों में जहां तापमान -60 से -70 डिग्री सेल्सियस था। ऐसी दुर्गम पहाड़ियों में भारत ने पाकिस्तान को धूल चटाई थी।

दुनिया की सबसे सफल लड़ाईयों में शामिल ऑपरेशन मेघदूत

सियाचिन की दुर्गम पहाड़ियों में युद्ध आसान नहीं था। तापमान इतना कम था कि अगर शरीर के अंग किसी धातु के संपर्क में आ जाएं तो गल जाएं। ऐसे हालात में भारतीय सेना ने ऑपरेशन मेघदूत चलाकर पाकिस्तान को पटखनी दी थी। यही वजह है कि जब कभी भी दुनिया की सबसे सफल लड़ाईयों का जिक्र आता है तो उसमें ऑपरेशन मेघदूत भी शामिल हैं। आपको बता दें कि ऐसी विषम परिस्थितियों में ऑपरेशन मेघदूत एक या दो महीने या एक या दो साल नहीं चला था। ऑपरेशन मेघदूत साल 1984 में शुरू हुआ था और साल 2002 में जाकर खत्म हुआ था। 18 सालों तक भारत और पाकिस्तान की सेनाएं एक-दूसरे के सामने खड़ी थीं

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