हिमा को बचपन से ही खेलकूद में रुची थी। स्कूल के दिनों में हेमा लड़कों के साथ फुटबॉल खेला करती थी।

एक क्रिकेटर खेल के मैदान में बले से छक्का लगाता है, लेकिन भारत के पास एक धावक ऐसी है जिसने दौड़ से छक्का लगाया है। हिमा दास जो जुलाई 2019 के महीने में ऐसी दौड़ी की जीत लिए 6 गोल्ड।

कहानी गोल्डन गर्ल हिमा दास के गोल्डन सफर की..

हिमा ने बेहद ही कम उम्र में फर्श से अर्श तक का सफर तय किया। साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली हिमा दास से कामयाबी की ऐसी इबारत लिखी कि आज हर कोई उन्हें सलाम कर रहा है। 09 जनवरी 2000 को असम के ढिंग गांव में जन्मी हिमा दास चार भाई-बहनों में अपने पिता की सबसे छोटी बेटी है। हेमा को बचपन से ही खेलकूद में रुची थी। स्कूल के दिनों में हेमा लड़कों के साथ फुटबॉल खेला करती थी। यहीं से स्पोर्टस में उनकी रूची बढ़ती चली गई।

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फुटबॉल में अपना कैरियर देख रही हिमा भारत के लिए फुटबॉल खेलने का सपना संजो रही थी लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। भारत के फूटबॉल खेलने का सपना देखने वाली हिमा फूटबॉल नहीं खेल पाई लेकिन भारत के लिए ऐसी दौड़ लगाई कि एक के बाद एक कई जीत भारत की झोली में डाल दी।

कहानी गोल्डन गर्ल हिमा दास के गोल्डन सफर की..

उनके दौड़ने के सफर की बात करें तो जवाहर नवोदय विद्यालय के शारीरिक शिक्षक शमशुल हक की सलाह पर उन्होंने दौड़ना शुरू किया। शमशुल हक़ ने उनकी पहचान नगाँव स्पोर्ट्स एसोसिएशन के गौरी शंकर रॉय से कराई। फिर हिमा दास जिला स्तरीय प्रतियोगिता में चयनित हुईं और दो स्वर्ण पदक जीतें। इसके बाद जिला स्तरीय प्रतियोगिता के दौरान ‘स्पोर्ट्स एंड यूथ वेलफेयर’ के निपोन दास की हिमा पर पड़ी और वहीं से शुरु हुई अंतर्रारष्ट्रीय सरज़मी पर हिमा के गोल्ड मेडल जीतने के सफर की तैयारी

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अप्रैल 2018 में गोल्ड कोस्ट में खेले गए कॉमनवेल्थ खेलों की 400 मीटर की रेस में हिमा दास ने 51।32 सेकेंड में दौड़ पूरी करते हुए छठवाँ स्थान प्राप्त किया। 18वें एशियन गेम्स 2018 जकार्ता में हिमा दास ने दो दिन में दो बार 400 मीटर रेस में राष्ट्रीय रिकार्ड तोड़कर रजत पदक जीता है।

हिमा के 6 गोल्ड का सफर

कहानी गोल्डन गर्ल हिमा दास के गोल्डन सफर की..

2019 में हिमा ने पहला गोल्ड मेडल 2 जुलाई को ‘पोज़नान एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स’ में 200 मीटर रेस में जीता। इसके बाद 7 जुलाई 2019 को पोलैंड में ‘कुटनो एथलेटिक्स मीट’ में 200 मीटर रेस में हिमा ने 23।97 सेकंड में रेस जीत दूसरा गोल्ड मेडल हासिल किया। फिर आई 13 जुलाई 2019 की तारीख। 13 जुलाई 2019  को हिमा ने चेक रिपब्लिक में ‘क्लांदो मेमोरियल एथलेटिक्स’ में 200 मीटर रेस जीत तीसरा गोल्ड मेडल भारत की झोली में डाला। लेकिन गोल्ड जीतने का सफर यहीं थमा नहीं।

कहानी गोल्डन गर्ल हिमा दास के गोल्डन सफर की..

19 साल की हिमा ने 17 जुलाई 2019 को चेक रिपब्लिक में ‘ताबोर एथलेटिक्स मीट’ में 200 मीटर रेस को 23।25 सेकेंड में पूरा कर चौथा गोल्ड मेडल हासिल किया। हिमा ने चेक गणराज्य में ही 20 जुलाई 2019 में 400 मीटर की रेस में 52।09 सेकेंड के समय में जीत हासिल की और फिर जीत 6वां गोल्ज मेडल और जुलाई को ना सिर्फ अपने लिए बल्कि भारत के लिए भी बना दिया गोल्डन जुलाई।

कहानी गोल्डन गर्ल हिमा दास के गोल्डन सफर की..

हिमा की जीत का यह गोल्डन सफर आसान नहीं था। एथलेटिक्स में आने के बाद हिमा दास को सबसे पहले अपना परिवार छोड़कर करीब 140 किलोमीटर दूर आकर बसना पड़ा। शुरुआत में परिवार वाले राजी नहीं हुए, लेकिन कोच के काफी समझाने पर परिवारवाले मान गए। फिर शुरू हुआ हिमा की कामयाबी का सफर।

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हेमा एक अच्छी धावक होने के साथ-साथ एक जागरूक और अति संवेदशील इंसान भी है। इसका उदाहरण देखने को मिला जब हेमा असम बाढ़ पीड़ितों के लिए आगे आई। चेक गणराज्य में आयोजित क्लाड्नो एथलेटिक्स में भाग लेने पहुंचीं हिमा दास ने 17 जुलाई 2019 को मुख्यमंत्री राहत कोष में राज्य में बाढ़ के लिए अपना आधा वेतन दान कर दिया। इसके अलावा उन्होंने ट्वीट कर बड़ी कंपनियों और व्यक्तियों से भी आगे आकर असम की मदद करने की अपील की।

कहानी गोल्डन गर्ल हिमा दास के गोल्डन सफर की..

हिमा दास गोल्ड मेडल जीतने के बाद इंडियन एथलीट्स के साथ एलीट क्लब में शामिल हो चुकी हैं। हेमा एक ऐसी मजबूत शख्सियत बनकर उभरी हैं, जिसे आज हर कोई सलाम करता है। एक ऐसी हस्ती बनकर उभरी है जो अपनी कड़ी मेहनत और लगन से आम से खास बन गई।