ज्योति ने पिता को साइकिल पर बैठाकर तय किया 1200 किलोमीटर की दूरी

लॉकडाउन के दौरान बहादूरी दिखाते हुए गुरुग्राम से दरभंगा साइकिल चलाकर 1200 किलोमीटर का सफर तय कर गई ज्योति को भारतीय साइकिलिंग महासंघ (सीएफआई) ने ट्रायल का मौका दिया है।

लॉकडाउन के दौरान बहादूरी दिखाते हुए गुरुग्राम से दरभंगा साइकिल चलाकर 1200 किलोमीटर का सफर तय कर गई ज्योति को भारतीय साइकिलिंग महासंघ (सीएफआई) ने ट्रायल का मौका दिया है। सीएफआई के निदेशक वीएन सिंह ने दरभंगा पहुंची ज्योति का मनोबल बढ़ाया और उसे ‘क्षमतावान’ करार देते हुए कहा कि महासंघ उसे ट्रायल का मौका देगा और अगर वह सीएफआई के मानकों पर खरी उतरी तो उसे विशेष ट्रेनिंग और कोचिंग मुहैया कराई जाएगी।

बता दें कि लॉकडाउन में ज्योति गुरुग्राम में फंस गई थी जिसके बाद ज्योति अपने पिता को साइकिल पर बिठाकर 1200 किलोमीटर कि दूरी तय कर गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा पहुंची। ये सफर उसने आठ दिनों में पूरा किया। ज्योति हर रोज 100 से 150 किलोमीटक साइकिल चालाती थी। वीएन सिंह ने कहा कि महासंघ हमेशा प्रतिभावान खिलाड़ियों की तलाश में रहता है और अगर ज्योति में क्षमता है तो उसकी पूरी मदद की जाएगी.

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वीएन सिंह ने कहा, ‘‘हम तो ऐसे प्रतिभावान खिलाड़ियों की तलाश में लगे रहते हैं और अगर लड़की में इस तरह की क्षमता है तो हम उसे जरूर मौका देंगे. आगे उसे ट्रेनिंग और कोचिंग शिविर में डाल सकते हैं. उससे पहले हालांकि हम उसको परखेंगे. अगर वह हमारे मापदंड पर खरी उतरती है तो उसकी पूरी सहायता करेंगे. विदेशों से आयात की गई साइकिल पर उसे ट्रेनिंग कराएंगे.’’

लॉकडाउन के बाद ज्योति को ट्रायल का मौका देने के बारे में पूछे गया तो उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उससे बात की थी और उसे बता दिया है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद जब भी मौका मिलेगा वह दिल्ली आए और उसका इंदिरा गांधी स्टेडियम में हम उसका छोटा सा टेस्ट लेंगे. हमारे पास वाटबाइक होती है जो स्थिर बाइक है. इस पर बच्चे को बैठाकर चार-पांच मिनट का टेस्ट किया जाता है. इससे पता चल जाता है कि खिलाड़ी और उसके पैरों में कितनी क्षमता है. वह अगर इतनी दूर साइकिल चलाकर गई है तो निश्चित तौर पर उसमें क्षमता है.’’

वीएन सिंह ने स्वीकार किया कि 15 साल की बच्ची के लिए रोजाना 100 किमी से अधिक साइकिल चलाना आसान काम नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘14-15 साल की बच्ची के लिए रोजाना 100-150 किमी साइकिल चलाना आसान नहीं है. मैं मीडिया में आई खबरों के आधार पर ही बोल रहा हूं लेकिन अगर उसने सचमुच में ऐसा किया है तो वह काफी सक्षम है.’’

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उन्होंने कहा ,‘‘ उसने अपने पिता को भी साइकिल पर बैठा रखा था और उसके पास छोटा-मोटा सामना भी रहा होगा इसलिए उसने जो किया वह काबिलेतारीफ है. खेल की जरूरत के अनुसार वह सक्षम है या नहीं, इसका फैसला हम टेस्ट के बाद ही कर पाएंगे. उस टेस्ट में अगर हमारे मापदंड पर वह थोड़ी सी भी खरी उतरती है तो हम उसकी पूरी सहायत करेंगे और उसे विशेष कोचिंग दी जाएगी. ’’

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