Punjab के Pathankot में सबसे कम उम्र की लड़की Sarpanch बनने के बाद गांववासियों के लिए प्रेरणा स्त्रोत्र बनी। गांव वासियों को गांव की इस छोटी सरपंच पर गर्व है, गांव हाड़ा की पल्लवी ठाकुर गांव के विकास कार्यों में अपना अहम योगदान दे रही है। पल्लवी देश के प्रधानमंत्री के साथ मन की बात में भी बात कर चुकी हैं, पंजाब सरकार की ओर से भी इस Sarpanch को सम्मानित किया गया है। कुछ लोग अपनी बेटियों को गर्भ में ही मार देते हैं वह लोग यह नहीं जानते कि यह बेटियां आने वाले समय मे उनका नाम रोशन करेंगी। ऐसी ही एक बेटी है पठानकोट के गांव हाड़ा की, जो कि सबसे कम उम्र की Sarpanch बनने का खिताब हासिल कर चुकी है।

इस बेटी ने उन लोगों की बोलती भी बंद की है जो अपनी बेटियों को गर्भ में ही मार देते हैं और उन बेटियों के लिए भी यह मिसाल बनकर आई है जो जीवन में कुछ करना चाहती हैं और हालातों को देखते हुए हिम्मत छोड़ जाती हैं। उन सब लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत्र बनी पल्लवी ठाकुर, जो पंजाब में सबसे कम उम्र की Sarpanch बनी है। जिसने अपने गांव का भी बहुत विकास करवाया है। वह अपनी शिक्षा के साथ-साथ गांव के विकास कार्यों में भी अपना अहम योगदान दे रही हैं और गांव के हर एक परिवार की बड़ी लाडली हैं। पल्लवी ठाकुर ने लॉकडाउन के दौरान भी अपने गांव को बहुत बढ़िया तरीके से संभाला।

वहीं इस बारे में बातचीत करते हुए गांव वासियों ने कहा कि पल्लवी ठाकुर बहुत ही नेक लड़की है और सभी के लिए एक मिसाल है। वहीं जब पलवी ठाकुर के साथ इस बारे में बातचीत की तो उन्होंने कहा कि वह अपने गांव को बेहतर बनाने के लिए हर समय तैयार रहती है और उनका यही सपना है कि वह अपने गांव के लिए कार्य करवाएं। उन्होंने महिला दिवस के मौके पर कहा कि हर एक महिला को आत्मनिर्भर होना बहुत आवश्यक है और इन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी वे कई प्रयास कर रही हैं।

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