किसान आंदोलन को विपक्ष का समर्थन

नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं.दिल्ली बॉर्डर पर बड़ी संख्या में किसान जुटे हुए हैं. और सरकार से नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. वहीं अब कृषि कानूनों को लेकर सियासत भी परवान चढ़ती नजर आ रही है। सियासी पार्टियां लगातार खुद को किसान हितैषी बताने में जुटी हुई हैं साथ ही केंद्र सरकार को किसान विरोधी बता रही हैं।

बिहार में तेजस्वी ने संभाला मोर्चा

बिहार में नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव किसानों के मुद्दे को लेकर एनडीए सरकार सवाल खड़े कर रहे हैं। दरअसल महागठबंधन ने बिहार में पटना के गांधी मैदान में किसानों के समर्थन में प्रदर्शन किया लेकिन  कोविड-19 के चलते राज्य सरकार ने महागठबंधन के नेताओं को प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी थी। इसके अलावा विपक्षी दलों के नेताओं पर एफआईआर भी दर्ज कर दी गई। जिसके बाद तेजस्वी यादव ने खुद को किसान हितैषी बताते हुए सरकार को घेरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। तेजस्वी ने कहा कि वो किसानों के लिए फांसी तक चढ़ जाएंगे। तेजस्वी ने ट्वीट किया

डरपोक और बंधक मुख्यमंत्री की अगुवाई में चल रही बिहार की कायर और निक्कमी सरकार ने किसानों के पक्ष में आवाज उठाने के जुर्म में हम पर FIR दर्ज की है। दम है तो गिरफ़्तार करो,अगर नहीं करोगे तो इंतज़ार बाद स्वयं गिरफ़्तारी दूँगा।किसानों के लिए FIR क्या अगर फाँसी भी देना है तो दे दीजिए

सपा निकालेगी किसान यात्रा

समाजवादी पार्टी भी किसान आंदोलन का समर्थन कर रही है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी राज्य के हर जिले में किसान यात्रा निकालेगी…साथ ही अखिलेश यादव ने सरकार से कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की है..अखिलेश खुद कन्नौज मंडी से किसान बाजार तक किसान यात्रा में शामिल होंगे।

सरकार की बढ़ी टेंशन

एक ओर सरकार किसानों को मनाने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर किसान अपनी मांग पर अड़े हैं और अब विपक्षी  पार्टियां भी सरकार की टेंशन में इजाफा कर रही हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि सरकार किसानों को कैसे मनाती है।

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