इस संसार में कहने को हर कोई किसी ना किसी दुख से ग्रसित है और संयोग की बात है कि हर दुखी व्यक्ति को अपना दुख औरों से अधिक लगता है। दुख चाहे छोटा हो या बड़ा लेकिन जिंदगी में तनाव जरूर ले आता है, जो ना सिर्फ मन को ओझल कर देता है बल्कि कई लोगों के मन को परेशान कर उनकी खुशहाल जिंदगी का अंत निश्चित करता है। कोरोना महामारी में ऎसे ही कई लोग देश में बनी तनावपूर्ण परिस्थितियों को लेकर परेशान हैं, जहाँ सुरक्षा से ज़्यादा उन्हें अपने घर का गुज़ारा करने में आर्थिक दिक्कतें आ रहीं हैं। इसी विषय से  ही आपको रूबरू कराते हैं गाजियाबाद के रहने वाले मनीष और उसके परिवार से, इस परिवार की दास्तान आपकी आंखों में भी आंसू ला देगी।

तीन मासूम बच्चे,पत्नी और माता पिता समेत पूरे घर को चलाने की जिम्मेदारी निभाने वाले मनीष गुप्ता के सामने आर्थिक संकट के बादल गहरा गए हैं। मनीष का कहना है कि अब शायद भीख मांगने के अलावा कोई उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा है। मनीष का कहना है कि उनका घर साप्ताहिक बाजार में छोटी मोटी चीजें बेच कर चलता है, लेकिन हाल ही में प्रशासन के द्वारा साप्ताहिक बाजारों पर लगी रोक के कारण घर चलाना नामुमकिन हो गया है। बीते साल भी कोरोना महामारी  की वजह से परिवार का गुजारा चलाना काफी कठिन था।  वो साल बीतने के साथ एक  उम्मीद जागी थी, मगर एक बार फिर से कोरोना संकट ने साप्ताहिक बाजार बंद करवा दिए हैं। मनीष के सामने तीन बच्चों की पढ़ाई के अलावा पूरे परिवार को संभालने की जिम्मेदारी है। पिछले 18 सालों से मनीष साप्ताहिक बाजार लगाकर इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहे थे। मगर अब मनीष का हौसला बिलकुल टूट गया है। मनीष के घर में तीन बच्चे पत्नी और माता-पिता हैं। सप्ताह में दो बार बाजार लगाकर जो कमाई आती है, उसी से उसका पूरे हफ्ते घर चलता है। लेकिन सवाल यही है कि अगले हफ्ते क्या होगा।

मनीष जैसे ना जाने कितने ऐसे लोग इसी संकट जूझ रहे हैं। जिनके पास रोज़ी रोटी का कोई अन्य ज़रिया नहीं है। ऐसे में इन लोगों के मासूम बच्चों का  दर्द भी चीख-चीख कर पूछ रहा है, की इसमे हमारा क्या कसूर है। मनीष और उसके परिवार का सवाल यह भी है कि अगले हफ्ते उनके घर में चूल्हा कैसे जलेगा।

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