बेहद ख़ास है Purvanchal Expressway, जानें लड़ाकू विमानों के लिए कैसे है ज़रूरी

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देश में अब सड़कें आम से ख़ास होती जा रही हैं। आज PM Narendra Modi ने उत्तर प्रदेश में Purvanchal Expressway का उद्घाटन किया है। Purvanchal Expressway पर कूड़ेभार में 3.3 किलोमीटर लंबा रनवे भी बनाया गया है। यहां कठिन से कठिन परिस्थितियों में लड़ाकू विमानों की लैंडिंग कराई जा सकती है।

Purvanchal Expressway पर कूड़ेभार में 3.3 किलोमीटर लंबा रनवे भी बनाया गया है। यहां कठिन से कठिन परिस्थितियों में लड़ाकू विमानों की लैंडिंग कराई जा सकती है। Lucknow-Agra Expressway पर भी इसी प्रकार की हवाई पट्टी है।

चीन नए हवाई अड्डों का निर्माण कर रहा है। 3488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के नजदीक बने मौजूदा हवाई अड्डों को अपग्रेड कर रहा है। इस बीच आज PM Narendra Modi ने उत्तर प्रदेश में Purvanchal Expressway का उद्घाटन किया है। एयर चीफ मार्शल (सेवानिवृत्त) एस कृष्णास्वामी के अनुसार, यूपी राजमार्गों पर नवनिर्मित हवाई पट्टियां भारतीय वायु सेना (आईएएफ) की योजनाओं का हिस्सा हैं। विशेष रूप से मिराज -2000 एच जैसे लड़ाकू विमानों और सी-130 जे हरक्यूलिस जैसे परिवहन विमानों के वजन को संभालने के लिए सड़कों के साथ डिजाइन किए गए हैं।

Indian Air Force अपनी परिचालन योजनाओं के बारे में चुप्पी साधे हुई है। हालांकि, तथ्य यह है कि यूपी में दो निर्धारित हवाई पट्टियां एयरबेस के करीब हैं ताकि सबसे खराब स्थिति में लड़ाकू विमानों की लैंडिंग या परिवहन विमानों को ईंधन और आयुध की आपूर्ति की जा सके। कूड़ेभार हवाई पट्टी के पास के एयरबेस कानपुर, बरेली और गोरखपुर हैं, जो पड़ोसी चीन के खिलाफ लॉन्च करने के लिए फ्रंट-लाइन बेस हैं।

Chinese Air Force LAC के पार अपने लड़ाकों के लिए काशगर, होटन, दमक्सुंग, ल्हासा, शिगात्से, नगारी-गार गुन्सा, बांगडा और न्यिनमग्ची भूमिगत ठिकानों का निर्माण कर रही है। ताशिकोर्गन, पुरंग, टिंगरी और लुंटसे में नए एयरपोर्ट बना रही है। इसे देखते हुए Indian Air Force ने Expressway को लड़ाकू विमानों की लैंडिंग के लिए अनुकूल बनाने का फैसला किया।

पूर्व लड़ाकू पायलट ने कहा, “1965 और 1971 के युद्धों के दौरान, पाकिस्तानी वायु सेना के विमानों द्वारा हवाई ठिकानों पर बमबारी के कारण IAF ने लगभग अपने विमान खो दिए। उस अनुभव से सीखते हुए, वायु सेना ने इन निर्धारित हवाई पट्टियों का उपयोग राजमार्गों पर चौबीसों घंटे अस्थायी रोशनी, मोबाइल हवाई यातायात संचार, ईंधन भरने और हथियारों से लदे होने के बाद टेक-ऑफ करने के लिए करने का फैसला किया है।”

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