Home India Prayagraj Magh Mela शुरू होने से पहले ही दूषित हुआ ‘गंगा जल’

Prayagraj Magh Mela शुरू होने से पहले ही दूषित हुआ ‘गंगा जल’

0

काले रंग के गंगा जल में किस तरह करेंगे देशवासी ‘स्नान’

गंगा जल का हिंदू धर्म में क्या महत्व है ये हर देशवासी अच्छे से जनता है। Prayagraj Magh Mela 2021 शुरू होने में कुछ ही दिन बाक़ी रह गए हैं लेकिन गंगा जल बेहद खराब स्थिति में है। संगम नोज और अन्य घाटों पर गंगा जल के काला पड़ने की जानकारी  PMO, Central pollution control board से मांगने के बाद संबंधित विभाग बचाव में लगे हैं।

Pollution control board के क्षेत्रीय अधिकारी की ओर से दावे किए जा रहे हैं कि गंगा जल में BOD मानक के अनुरूप है। वहीं सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। बता दें कि शहर के रसूलाबाद, सलोरी, दारागंज, नैनी, झूंसी, फाफामऊ में सीधे गंगा में समाता नालों और एसटीपी का गंदा पानी इन दावों की पोल खोलता है। बिना शोधन के नालों का गंदा पानी गंगा और यमुना में गिराया जा रहा है। वह भी तब जब Magh Mele की शुरुआत में हफ्ते का ही समय बचा है। PMO से पूछताछ के बाद केंद्रीय और State pollution control board के वरिष्ठ अधिकारियों ने गंगा जल की शुचिता जांचने के निर्देश दिए। Pollution control board के क्षेत्रीय अधिकारी शुक्रवार को दिन भर गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों से नदियों का जल जांच के लिए बीकर और बोतलों में भर कर बतौर नमूना ले गए। नगर निगम की ओर से नामित संस्था ने घाटों पर सफाई भी कराई।

लद्धाख में चीन की चालबाजी, पकड़ा गया चीनी सैनिक

रामघाट, दशाश्वमेघ घाट के घाटियों और तीर्थ पुरोहितों के मुताबिक पिछले साल नवंबर के महीने में गंगा जल दूधिया और साफ था। 15 दिन से स्थिति खराब हुई है। गंगा जल का रंग बदलकर काला हो गया है। फाफामऊ, रसूलाबाद, सलोरी, दारागंज, नैनी और झूंसी में गंगा के किनारों पर जाने से पता चला कि गंगा जल का रंग बदलने का मुख्य कारण नदी में गिराए जा रहे गंदे नालों और एसटीपी का पानी है।

रामघाट पर दशकों से बैठ रहे पुरोहित और के मुताबिक पिछले November में गंगा जल का रंग दूधिया था। सूरज की रोशनी पड़ने पर जल चमकता था। बीच धार ही नहीं किनारों पर निर्मल गंगा की अविरल धारा थी। अब घाटों पर तो जल रंग बदल चुका है। श्रद्दालु भी इसकी शिकायत करते हैं, लेकिन आस्था में डुबकी जरूर लगाते हैं, डिब्बों में जल भी भरते हैं।

Pollution control board के क्षेत्रीय अधिकारी प्रदीप विश्वकर्मा शुक्रवार सुबह से ही टीम सदस्यों के साथ गंगा घाटों पर पहुंचे। जल के नमूने एकत्र किए। उन्होंने संगम नोज के साथ यमुना जल का भी नमूना जांच के लिए एकत्रित किया। उनका दावा है कि गंगा जल में BOD की मात्रा मानक के मुताबिक 3 से कम है। पिछली रिपोर्ट में इसका मापक 2.2 से 2.5 तक मिला है। वहीं पीएच और डीओ की रिपोर्ट संतोषजनक है। उनके मुताबिक गंगा जल की रिपोर्ट B श्रेणी की है। जल का रंग काला क्यों है, इस पर उनका कहना है कि देखने में जल का काला, मटमैला और हरा रंग बीकर या बोलत में भरने के बाद साफ दिखता है। इसके दूसरे कारण हैं। हम 1 जनवरी से गंगा जल की नियमित गुणवत्ता जांच रहे हैं। शुक्रवार को लिए गए जल नमूनों की रिपोर्ट 3 दिन बाद आएगी।

AB STAR NEWS  के  ऐप को डाउनलोड  कर सकते हैं. हमें फ़ेसबुकट्विटरइंस्टाग्राम  और यूट्यूब पर फ़ॉलो कर सकते हैं

Exit mobile version