इस बार पश्चिम बंगाल का चुनाव खास होने वाला है। टीएमसी ने 191 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। लेकिन 30 सालों में ऐसा पहली बार हो रहा है जब Mamta Banerjee भवानीपुर से चुनाव नहीं लड़ रही हैं। हालांकि ममता बनर्जी ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वे नंदीग्राम से चुनाव लड़ेंगी लेकिन उम्मीदवारों की घोषणा के साथ इस पर औपचारिक मुहर भी लग गई है कि इस बार ममता भवानीपुर से चुनाव नहीं लड़ रही हैं। दरअसल ममता के राजनीतिक सफर में भवानीपुर का अहम योगदान रहा है।

1991 से 2011 तक Mamta Banerjee कोलकाता (दक्षिण) से सांसद रहीं, जिसमें भवानीपुर भी शामिल है। 2011 में ममता बनर्जी भवानीपुर से विधायक रहीं। 2011  में ममता भवानीपुर से विधायक भी रहीं

उम्मीदवारों के ऐलान के दौरान Mamta Banerjee ने कहा कि वे भवानीपुर से चुनाव लड़ें या ना लड़ें भवानीपुर हमेशा उनकी मुट्ठी में रहेगा। और वे हमेशा यहां निगरानी रखेंगी। भवानीपुर से अब ममता की जगह सोवनदेव चटोपाध्याय चुनाव लड़ेंगे, जो पश्चिम बंगाल के ऊर्जा मंत्री भी हैं

लेकिन आखिर Mamta Banerjee अब भवानीपुर से चुनाव क्यों नहीं लड़ रही हैं। क्या वे टीएमसी से बगावत करने के बाद बीजेपी की नैय्या पर सवार सुवेंदु अधिकारी को उन्हीं के गढ़ में हराने का मन बना चुकी हैं या फिर बात कुछ और है। दरअसल अगर वजहों को तलाशें तो

जिस तरह से साल 2014 में मोदी लहर चली है उसकी वजह से भवानीपुर में भी वोट वोट पैटर्न पर बड़ा असर पड़ा है

2011 से 2014 के बीच बीजेपी के वोट बढ़कर 5 हजार 78 से बढ़कर 47 हजार 465 पहुंच गए हैं

जिन तीन चुनावों में ममता बनर्जी लड़ी, भवानीपुर में वोट शेयर गिरने लगा

2011 के उपचुनाव में ममता बनर्जी को 77 फीसदी वोट मिले

2016 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को 2011 के मुकाबले 29.79 फीसदी कम वोट मिले

2019 के लोकसभा चुनाव में भी टीएमसी केवल 3 हजार 168 वोटों से आगे रही।

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