सरकार को जहां पर काम करना चाहिए वहां काम करने के बजाय सरकार अजीबोगरीब फैसले लेने में लगी हुई है।

लोकसभा चुनाव 2019 के बाद से ही भारत में कहीं भी शांति नहीं देखी गई है। सरकार को जहां पर काम करना चाहिए वहां काम करने के बजाय सरकार अजीबोगरीब फैसले लेने में लगी हुई है जिसकी वजह से देश के कोने-कोने में हिंसा फैली हुई है। लगातार दूसरी बार सरकार में आते ही भारतीय जनता पार्टी ने कई ऐतिहासिक फैसले लिए। उसके कई ऐतिहासिक फैसलों ने काम भी किया। उसके बाद अमित शाह ने नागरिकता संशोधन बिल का मुद्दा उठाया। यह बिल लोकसभा और विधानसभा दोनों जगह पास करा लिया गया है लेकिन लोगों ने इसे मानने से मना कर दिया।

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नागरिकता संशोधन बिल को लेकर जामिया यूनिवर्सिटी से शुरू हिंसा धीरे-धीरे पूरे देश में फैलती चली गई। देश का शायद कोई बड़ा इंस्टीट्यूट बचा होगा जहां पर इस बिल को लेकर कोई विवाद ना हुआ हो। बड़ी मुश्किल से अभी हिंसा धीरे-धीरे कम हुई थी। अब जेएनयू यूनिवर्सिटी और एबीवीपी के बीच एक और विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल रविवार रात को कुछ नकाबपोश लोगों ने जेएनयू के छात्रों पर हमला कर दिया। इस हमले में कई छात्र जख्मी हो गए। इस हमले का जिम्मेदार भी छात्रों ने भारतीय जनता पार्टी को ही ठहराया और दिल्ली पुलिस पर भी सवाल उठाए।

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जेएनयू विवाद पर नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने भी बड़ा बयान देते हुए कहा है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हिंसा पर काफी दुख हुआ। सोमवार को उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में भय के माहौल के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के छात्र संगठनों के साथ बैठकर सीधा संवाद करना चाहिए। उन्होंने अपने बयान में यहां तक कह दिया है कि यदि जामिया और जेएनयू के छात्रावासों में हमारी बेटियां सुरक्षित नहीं है तो इससे ज्यादा शर्मनाक बात कोई हो ही नहीं सकती।