पांच राज्यों में होने वाले चुनाव पर कितना असर?

कृषि कानूनों को लेकर सरकार और किसानों के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है, वहीं दूसरी ओर किसान आंदोलन को लेकर सियासत भी खूब हो रही है। इस साल पांच राज्यों में चुनाव होने हैं। ऐसे में विपक्ष को सरकार के खिलाफ एक मुद्दा मिल गया है और विपक्ष इस मुद्दे को हर हाल में भुनाने की कोशिश करता नजर आ रहा है। इसी कड़ी में आज किसानों के समर्थन में कांग्रेस पार्टी ने किसान अधिकार दिवस मनाया। दिल्ली कांग्रेस ने राजभवन घेराव का मन बनाया था जिन्हें रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने कंटीली तारों से बैरिकेडिंग की थी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच मार्च के दौरान धक्का मुक्की भी देखने को मिली वहीं कांग्रेस नेता अल्का लांबा का हाथ कंटीली तार में फंसने की वजह से फट गया

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इस दौरान राहुल गांधी भी दिल्ली कांग्रेस के कार्यक्रम में शिरकत की और तीनों कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। राहुल गांधी ने कहा कि किसान अपने हक के लिए सालों से लड़ रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि पहले भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों की जमीनें छीनने का प्रयास किया था और उस वक्त कांग्रेस ने उन्हें रोका था। अब बीजेपी एक बार फिर अपने कुछ मित्रों के साथ किसानों के अधिकार छीनने का प्रयास कर रही है।

क्या पांच राज्यों में होने वाले चुनावों पर पड़ेगा असर?

इस साल पांच राज्यों में चुनाव होने हैं। जिसमें पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुड्डुचेरी शामिल हैं। ऐसे में विपक्ष को सरकार के खिलाफ मुद्दा मिल गया है। यही वजह है कि विपक्ष किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है। कह सकते हैं कि पांच राज्यों में चुनाव से पहले किसान आंदोलन से विपक्ष को संजीवनी मिल गई है। ऐसे में अब ये देखना दिलचस्प होगा कि आगामी चुनावों में किसान आंदोलन का किसतना असर देखने को मिलता है।

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