मध्य प्रदेश, बिहार, ओडिशा और उत्तराखंड में सभी पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित किया गया है। मध्य प्रदेश के CM शिवराज सिंह ने इसका एलान किया है। बता दें कोरोना काल में मीडियाकर्मी भी लगातार अपनी जान जोखिम में डाल कर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा उन्हें भी फ्रंटलाइन कार्यकर्ता घोषित करना तारीफ के काबिल है।

पूरा देश इस बिमारी से जूझ रहा है। वही कई पत्रकार भी इस बिमारी की चपेट में आ रहे है। लेकिन इसके बावजूद वह अपना काम में डटे हुए है और इस बिमारी का डट कर सामना कर रहे है।वही, बिहार में न केवल मान्यता प्राप्त पत्रकार बल्कि जिन पत्रकारों को मान्यता प्राप्त नहीं है उन्हे भी फ्रंटलाइन वर्कर की श्रेणी में शामिल कर सरकार प्राथमिकता के आधार पर उनका टीकाकरण कराएगी। CM नीतिश कुमार ने भी ये निर्देश दिया है कि जो पत्रकार सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची में नहीं हैं, उन्हें जिला जनसंपर्क अधिकारी द्वारा सत्यापित किए जाने के बाद टीका लग सकेगा।

अब सभी चिह्नित पत्रकारों को प्राथमिकता के आधार पर कोविड-19 का टीकाकरण कराया जाएगा। यही नही अब प्रिंट मीडिया के साथ-साथ इलेक्ट्रोनिक पत्रकारों को भी टीका लगाया जाएगा।ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पत्रकारों को भी फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स घोषित किया है।
हाल ही में अभी वरिष्ठ पत्रकार रोहित सरदाना की मौत हो गई। उनकी मौत का कारण भले ही हार्ट -अटैक से हुई हो, लेकिन वह भी कोरोना संक्रमित थे। उनकी मौत ने पूरे मीडिया जगत को हिला कर रख दिया था। राष्ट्र्रपति रामनाथ कोविन्द से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी मौत पर दुख जताया था। रोहित सरदाना कोरोना काल में भी लगातार आम-जनता तक खबरें पहुंचाने के लिए कार्य कर रहे थे। इसके अलावा ना जाने कितने पत्रकार देश के लोगों को सही और निष्पक्ष सूचना देने के लिए कोरोना काल में भी लगे हुए हैं। यही वजह है कि उन्हें भी फ्रंटलाइन वर्कर कहना गलत नहीं होगा।

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