चुनाव से पहले PM Modi ने बिहार की जनता को लुभाने की करी कोशिश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य को बड़ी सौगातें दी। पीएम मोदी ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत 84.27 करोड़ की लागत से पूर्णिया सीमेन स्टेशन, 8.06 करोड़ की लागत से बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना में इम्ब्रयो ट्रांसफर टेक्नोलॉजी (ईटीटी) एवं आईवीएफ लैब का उद्घाटन किया। इस तरह पीएम ने बिहार को 294 करोड़ की योजनाओं की सौगात दी।

देश की जनता को किस तरह लुभाना है ये पीएम मोदी अच्छी तरह जानते हैं शायद इसलिए ही पीएम मोदी ने भाषण की शुरुआत भोजपुरी में की। पीएम ने कहा, ‘रऊआ सबके प्रणाम बा, देशवा खातिर बिहार खातिर, गांव के जिंदगी के आसान बनावे खातिर और व्यवस्था मजबूत करे खातिर मछली उत्पादन, डेयरी और कृषि क्षेत्र में पढ़ाई और रिसर्च से जुड़ले सैकड़न करोड़ रुपये के योजना के शिलान्यास और लोकार्पण भइल ह। एकरा खातिर सौसे बिहार के भाई बहन लोगन के बधाई दे तनी।’

मीडिया को होना होगा ग्लोबल: PM मोदी

इसके बाद पीएम अपनी बात हिंदी में कहने लगे। उन्होंने राज्यपाल फागु चौहान, सीएम नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी समेत तमाम लोगों के नाम लिए। पीएम मोदी ने अपने भाषण के दौराना नारा दिया- ‘जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान।’

पीएम मोदी ने कहा कि बिहार में बाढ़ से खेती को कैसे बचाया जाए इसके लिए महात्मा गांधी रिसर्च सेंटर बनाया गया है। ऐसी अनेक संस्थाएं कृषि को विज्ञान और तकनीक से जोड़ने के लिए शुरू की गई हैं। अब गांव के पास ऐसे क्लस्टर बनेंगे जहां फूड प्रोसेसिंग से जुड़े उद्योग लगेंगे। उन्होंने कहा कि ई गोपाला में काम पूरा होती ही सिर्फ पशु का आधार नंबर डालने से उस जानवर की हर जानकारी मिल जाएगी। इससे लोगों को पशु खरीदने में सहूलियत हो जाएगी। बहुत कम लोगों को पता है कि असली पूसा दिल्ली में नहीं बल्कि बिहार के समस्तीपुर में है।

CM नीतीश की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने उनके काम गिनाए

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ‘नीतीश जी के नेतृत्व में गांव-गांव पानी पहुंचाने के लिए प्रशंसनीय काम हुआ है। आज आंकड़ा बढ़कर 70% से अधिक हो गया है। इस दौरान डेढ़ करोड़ लोगों को जोड़ा गया है। कोरोना काल में भी 60 लाख से ज्यादा लोगों को नल का जल दिलवाना सुनिश्चित किया गया है। ये हमारे गांवों की ताकत है कि कोरोना के बावजूद अनाज,फल और दूध समेत बाकी जरुरी चीजों की सप्लाई रुकी नहीं। केंद्र सरकार ने भी इस विपरीत परिस्थिति के बावजूद बिहार के 75 लाख किसानों को किसान सम्मान योजना का फायदा पहुंचाया। गांव में इस वैश्विक महामारी को कम रखने में सफल हुए हैं। ये इसलिए भी तारीफ के लायक है कि कोरोना के अलावा बाढ़ की विभीषिका और भारी बारिश के बाद  भी बिहार ने हालात को संभाले रखा। कोरोना संकट में अनेक साथी पशुपालन की तरफ बढ़ रहे हैं। केंद्र और बिहार सरकार की योजनाओं से उन्हें फायदा मिल रहा है। जो लोग ये कर रहे हैं वो लिख लें कि इसका भविष्य उज्जवल है। हमारे गांव आत्मनिर्भर बने और अगली सदी में ब्लू रिवॉल्यूशन का असर दिखे। PM मत्स्य संप्रदा योजना इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई है। अगले 5 साल में इसमें 20 हजार करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च किए जाएंगे। आज 1700 करोड़ रुपयों का काम शुरू हो गया है।’

PM मोदी ने कहा, “अब भारत उस स्थिति की तरफ बढ़ रहा है जब गांव के पास ही ऐसे क्लस्टर बनेंगे जहां फूड प्रोसेसिंग से जुड़े उद्योग भी लगेंगे और पास ही उससे जुड़े रिसर्च सेंटर भी होंगे। यानि एक तरह से हम कह सकते हैं- जय किसान, जय विज्ञान और जय अनुसंधान।”

राहुल ने GST को आर्थिक सर्वनाश बताकर PM मोदी को किया कटघरे में खड़ा

उन्होंने कहा, “आज देश के 21 राज्यों में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का शुभारंभ हो रहा है। अगले 4-5 सालों में इस पर 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए जाएंगे। इसमें से आज 1700 करोड़ रुपए का काम शुरु हो रहा है। आज जितनी भी ये योजनाएं शुरू हुई हैं उनके पीछे की सोच ही यही है कि हमारे गांव 21वीं सदी के भारत, आत्मनिर्भर भारत की ताकत बनें, ऊर्जा बनें।” पीएम मोदी ने बिहार के पशुपालकों से बात भी की।

दरअसल, प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना मत्स्य क्षेत्र पर केंद्रित योजना है, जिसे आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत 2020-21 से वित्त वर्ष 2024-25 तक लागू किया जाना है। इस पर अनुमानित रूप से 20,050 करोड़ रुपये का निवेश होना है। बता दें कि मत्स्य सम्पदा योजना के तहत, 20,050 करोड़ रुपये का निवेश मत्स्य क्षेत्र में होने वाला सबसे ज्यादा निवेश है। इसमें से लगभग 12,340 करोड़ रुपये का निवेश समुद्री, अंतदेर्शीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि में लाभार्थी केन्द्रित गतिविधियों पर तथा 7,710 करोड़ रुपये का निवेश फिशरीज इन्फ्रास्ट्रक्च र के लिए प्रस्तावित है।

जानें, क्या है गोपाला ऐप

ई-गोपाला ऐप के बारे में खुद पीएम ने ट्वीट कर कहा है कि यह हमारे मेहनती किसानों के लिए एक व्यापक नस्ल सुधार बाजार और सूचना पोर्टल प्रदान करता है। यह एक अभिनव प्रयास है, जिससे कृषि क्षेत्र को बहुत लाभ होगा। इस ऐप के जरिए कृत्रिम गर्भाधान, पशु की प्राथमिक चिकित्सा, टीकाकरण, उपचार आदि और पशु पोषण के लिए किसानों का मार्गदर्शन किया जा सकेगा। वहीं टीकाकरण, गर्भावस्था निदान, शांत करने आदि के लिए नियत तारीख और किसानों को क्षेत्र में विभिन्न सरकारी योजनाओं, अभियानों के बारे में भी यह ऐप सूचित करेगा। ई-गोपाला ऐप इन सभी पहलुओं पर किसानों को समाधान प्रदान करेगा।

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