Muharram पर इमाम हुसैन की याद में नम हुईं लोगों की आंखें

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आज देश दुनिया में Muharram मनाया जा रहा है। Muharram का महीना 31 जुलाई से शुरू हो चुका है। Muharram का दसवां दिन आशूरा कहलाता है। इस दिन Muharram मनाया जाता है। इस साल 09 अगस्‍त को Muharram की दसवीं तारीख है। लाखों करोड़ों लोगों इमाम हुसैन के चाहने वालों की आंखें आज नम हैं।

जानें, क्‍यों खास है Muharram का दसवां दिन

Muharram महीने का दसवां दिन सबसे खास माना जाता है। Muharram महीने की दस तारीख को कर्बला की जंग में पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। हजरत इमाम हुसैन ने इस्‍लाम की रक्षा के लिए खुद को कुर्बान कर दिया था। इस जंग में उनके 72 साथी भी शहीद हुए थे। कर्बला की जंग हजरत इमाम हुसैन और यजीद की सेना के बीच हुई थी। हजरत इमाम हुसैन का मकबरा इराक के शहर कर्बला में उसी जगह है जहां यह जंग हुई थी। यह शहर इराक की राजधानी बगदाद से 120 किलोमीटर दूर है।

कर्बला की जंग तकरीबन 1400 साल पहले हुई थी। यह जंग जुल्म के खिलाफ इंसाफ और इंसनियत के लिए लड़ी गई थी। दरअसल, यजीद नाम के शासक ने खुद को खलीफा घोषित कर दिया था और वो अपना वर्चस्व कायम करना चाहता था। उसने इसके लिए लोगों पर सितम ढाए और बेकसूरों को निशाना बनाया। वह हजरत इमाम हुसैन से अपनी स्वाधीनता स्वीकार कराना चाहता था। उसने इमाम हुसैन को भी तरह-तरह से परेशान किया लेकिन उन्होंने घुटने नहीं टेके। जब यजीद की यातनाएं ज्यादा बढ़ गईं तो इमाम हुसैन ने परिवार की रक्षा के लिए उन्हें लेकर मक्का हज पर जाने का फैसला किया। हालांकि, उन्हें रास्ते में मालूम चल गया कि यजीद के सैनिक वेश बदलकर उनके परिवार को शहीद कर सकते हैं।

इसके बाद इमाम हुसैन ने हज पर जाने का इरादा छोड़ दिया, क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि पवित्र जमीन खून से सने। उन्होंने फिर कूफा जाने का निर्णय किया, लेकिन यजीद के सैनिक उन्हें कर्बला ले गए। कर्बला में इमाम हुसैन पर बेहद जुल्म किया गया और उनके परिवार के पानी पीने तक पर रोक लगा दी गई। यजीद इमाम हुसैन को अपने साथ मिलाने के लिए लगातार दबाव बनाता रहा। वहीं, दूसरी तरफ इमाम हुसैन अपने मजबूत इरादों पर डटे रहे। यजीद के सैनिकों ने फिर इमाम हुसैन, उनके परिवार और साथियों पर हमला कर दिया। इमाम हुसैन और उनके साथियों ने यजीद की बड़ी सेना का हिम्मत के साथ मुकाबला किया। उन्होंने इस मुश्किल वक्त में भी सच्चाई का दामन नहीं छोड़ा और आखिरी सांस तक गलत के खिलाफ लड़ते रहे।

जानें, क्यों मनाते हैं Muharram में मातम

Muharram की दस तारीख को बड़ी तादाद में मातम किया जाता है। यह मातम हजरत इमाम हुसैन की शहादत के गम में मनाया जाता है। Muharram में मुसलमान हजरत इमाम हुसैन की इसी शहादत को याद करते हैं। शिया मुस्लिम समुदाय के लोग 10 तारीख को बड़ी तादाद में ताजिया और जुलूस निकालकर गम मनाते हैं। जुलूस के दौरान पूर्वजों की कुर्बानी की गाथाएं सुनाई जाती हैं ताकि लोग धार्मिक महत्व और जीवन मूल्यों को समझ सकें।

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