Owaisi ने खुलकर कहा, ‘बच्चे दो ही अच्छे’ के कानून का नहीं करूंगा समर्थन

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AIMIM के प्रमुख Asaduddin Owaisi अपनी बात खुलकर सबके सामने बोलने के लिए जाने जाते हैं। इस बार भी वो देश में बढ़ती आबादी को लेकर अपनी बात सबके सामने रख चुके हैं। आबादी नियंत्रित करने को लेकर बहस लंबी है। यहां तक कि असम, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तराखंड, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में नियम लागू है कि यदि किसी के दो से अधिक बच्चे हैं तो वह स्थानीय निकाय चुनावों में नहीं उतर सकता। भाजपा नेता गिरिराज सिंह भी जनसंख्या को लेकर कानून बनाए जाने की मांग करते रहे हैं। हालांकि भारत सरकार की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

बढ़ती आबादी इस वक़्त चिंता का विषय बनी हुई है। इन दिनों बहस चल रही है और एक वर्ग की ओर से इस पर नियंत्रण के लिए कानून बनाए जाने की मांग की जा रही है। इस बीच Asaduddin Owaisi का कहना है कि वह ऐसे किसी कानून के समर्थन नहीं करेंगे, जिसमें दो बच्चे पैदा करने की सीमा तय कर दी जाए। Owaisi ने बातचीत में कहा, ‘हमें चीन की गलती नहीं दोहरानी चाहिए। मैं ऐसे किसी कानून का समर्थन नहीं करूंगा, जिसमें दो बच्चों की नीति बनाने की बात हो। इससे देश को कोई फायदा नहीं होगा।’ इससे पहले Owaisi ने कहा था कि जनसंख्या में इजाफे के लिए मुस्लिमों को जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए।

Asaduddin Owaisi का कहना था कि मुस्लिम समुदाय गर्भ निरोधक का इस्तेमाल करने में सबसे आगे रहा है। उन्होंने यूपी के CM Yogi के उस बयान के जवाब में यह बात कही थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि किसी एक वर्ग की जनसंख्या ज्यादा बढ़ने से अराजकता फैल जाएगी और जनसंख्या का असंतुलन नहीं होना चाहिए। Owaisi ने उन्हें जवाब देते हुए कहा था, ‘उनके अपने हेल्थ मिनिस्टर का कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए किसी कानून की जरूरत नहीं है। मुस्लिम ही गर्भ निरोधक उपायों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।’

मुस्लिमों की आबादी तेजी से बढ़ने के सवाल पर Owaisi ने कहा था, ‘क्या मुस्लिम भारत के रहने वाले नहीं हैं? यदि हम सच्चाई देखें तो यहां के मूल निवासी को आदिवासी और द्रविड़ ही हैं। यूपी में बिना किसी कानून के ही फर्टिलिटी रेट में कमी 2026-30 के बीच देखने को मिल सकती है।’ Owaisi ने गुरुवार को कहा कि भारत की फर्टिलिटी रेट लगातार कम हो रही है। 2030 तक इसमें स्थिरता देखने को मिलेगी। हमें चीन की गलती यहां नहीं दोहरानी चाहिए।

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