श्रम कानून में बदलाव का नाजायज़ फायदा उठा रही हैं कंपनियां

सिर पर बंधी पट्टी और और आंखों में उम्मीदों के भरे आंसू महिला कर्मचारी का दर्द बयान कर रहे थे। जो दर्द था काम करने के बाद भी सैलरी न मिलने का, और इसके ऊपर हुए लाठी चार्ज का। नौकरी पर रख कर वेतन न देना, और वेतन मांगने पर उन पर अत्याचार करना। ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी के कर्मचारी जो कंपनी के उत्पीड़न का शिकार हुए हैं। महिला और इसके साथ मौजूद कर्मचारी नोएडा सेक्टर-63 में ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी में काम करते थे। जिनको लॉकडाउन में जी भर के परेशान किया जा रहा है। बता दें कि ये कर्मचारी तपती धूप में कंपनी के बाहर अपने हक के लिए प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन कंपनी ने उन्हें समझाना तो दूर उन्हें सुनना तक जरूरी नहीं समझा और करवा दिया सारे कर्मचारियों पर लाठी चार्ज।

सामने आई तस्वीरों से देख अंदाजा लगा लिया गया कि कैसे इन श्रमिकों को इस कंपनी ने मजबूर कर दिया है कि वो सड़क पर धूप में खड़े हो प्रदर्शन करें।

 

श्रम कानून में बदलाव से कंपनियों ने बदले तेवर, ओरिएंट क्राफ्ट…

पहले ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी के बाहर, फिर डीएम कार्यालय के बाहर दोनों जगह इन कर्मचारियों ने न्याय की गुहार लगाई कि कोई तो इनकी मदद करे लेकिन किसी ने इनकी नहीं सुनी। बता दें कि लॉकडाउन के बीच जब सभी कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति खराब है और उम्मीद कर रहे हैं कि जहां वो काम कर रहे थे या कर रहे हैं वहां से उनको उनका वेतन मिले। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है।

आगे हम आपको कंपनियों की मनमानी का कारण बतायें उससे पहले जरा सिटी मजिस्ट्रेट उमाशंकर से एबी स्टार न्यूज ने बात की कि इन कर्मचारियों की मदद क्यों नहीं की गई और ऊपर से जब इन्होंने अपने हक की लड़ाई लड़नी चाही तो इन पर लाठी चार्ज कर दिया गया

इन कर्मचारियों पर हुए पुलिस के लाठी चार्ज की बात से मुकरते हुए नजर ईये सिटी मजिस्ट्रेट और बड़ी आसानी से बोल दिया कि इन कर्मचारियों पर लाठी चार्ज नहीं किया गया सिर्फ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया गया है।

आपको बता दें कि कि 2 जुलाई को ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी के कर्मचारियों ने कंपनी के बाहर प्रदर्शन किया था। जहां उनसे बातचीत के दौरान पता चला कि कंपनी न तो उनको वेतन दे रही है और न ही उनका इस्तीफा स्वीकार कर रही है।

ओरिएंट कंपनी की मनमानी,कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन

अब आपको बता दें कि आखिर ज्यादातर कंपनियां क्यों अपने कर्मचारियों को परेशान कर रही है। तो इसका कारण है श्रम कानून में हुआ बदलाव। जी हां लॉकडाउन में कारोबार ठीक से न चल पाने के कारण कारखानों और प्रतिष्ठानों को तीन साल के लिए ज्यादातर लेबर लॉ यानि श्रम कानून से मुक्त कर दिया गया था। जिसके अंतर्गत कंपनियों को कई राहत दी गई जिसमें कर्मचारियों की शिफ्ट से लेकर उनको कंपनी से निकालने तक का अधिकार दिया गया। लेकिन ये कंपनियों की माली हालत के खराब होने के चलते किया गया था। जिसका कुछ कंपनियां भरपबर नाजायज फायदा उठा रही हैं। अगर श्रम कानून में हुए बदलाव के अनुसार कर्मचारियों के कंपनी से निकालने का अधिकार दिया गया लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं था कि किसी भी वक्त इन कर्मचारियों को निकाल दिया जाये। हां कर्मचारियों को निकाल सकते हैं लेकिन उनका हिसाब पूरा कर के और उनको बता के। लेकिन कंपनियों ने इसको अपने स्वार्थ के लिए इसका उपयोग करना शुरू कर दिया। इस तानाशाह कंपनियों के नाम की सूची में ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी भी शामिल हो चुकी है।

 

 बता दें कि 2 जुलाई को जब सिटी मजिस्ट्रेट से बात की गई थी तब उन्होंने कहा था कि कंपनी के कर्मचारी और मालिक को बुलाकर बात की जायेगी। जिसके बाद 4 जुलाई को इन कर्मचारियों को नोएडा सेक्टर-71 के थाने बुलाया गया। जहां काफी देर तक हुई बात के बाद ये नतीजा निकला कि सभी कर्मचारियों को 10 जुलाई को ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी बुलाया गया है। अब देखने वाली बात होगी कि क्या इन कर्मचारियों की परेशानी का हल वाकई में मिल गया है। क्या वाकई में इन कर्मचारियों की मदद की गुहार सुन ली गई है। फिलहाल ये तो आगे आने वाले वक्त में ही पता चलेगा।

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