उफ़ ये महंगाई, जानें पिछले साल की तुलना में इस साल कैसी रहेगी ‘Diwali’

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महंगाई की मार झेल रही जनता किस तरह Diwali का त्यौहार मनाएगी ये तो जनता ही जाने। Corona virus के बाद इस बार की Diwali कुछ ख़ास मनाई जाएगी ये कह पाना भी मुश्किल है। Diwali आने में अब कुछ ही हफ्ते बचे हैं। हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस समय मांग अपने चरम पर है।

Corona महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था में मांग का बढ़ना अच्छा संकेत है। पिछले साल की तुलना में इस साल का त्योहारी सीजन कैसा रहना वाला है ये जानने के लिए ये लेख ज़रूर पढ़ें।

Corona virus की पकड़ कमज़ोर होना –

देश दुनिया में Corona महामारी की पहली लहर का पीक सितंबर 2020 में था। जबकि दूसरी लहर का पीक 9 मई को था और यह ज्यादा खतरनाक थी। इसके बाद से स्थिति में काफी तेज़ी से सुधार देखने को मिला है। रोज़ाना नए मामलों का वर्तमान स्तर और संक्रमण दर (प्रति सौ जांच पर) पिछले साल दशहरा और Diwali के बीच के मामलों का एक तिहाई है। अगर इस तुलना से केरल को अलग कर देते हैं तो स्थिति और भी बेहतर नजर आती है, क्योंकि केरल का इस समय नए मामलों में योगदान 50 फीसदी से अधिक है, लेकिन पिछले साल दशहरा और दिवाली की तुलना में 20% से भी कम मामले सामने आए।

कमोडिटी की कीमतों में तेज़ी अब भी बड़ी समस्या

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) द्वारा मापी गई खुदरा मुद्रास्फीति में की यह समस्या शायद हेडलाइन में न दिखे। जबकि, सितंबर 2020 में सीपीआई में वार्षिक वृद्धि 7.3% थी। जबकि सितंबर 2021 में यह संख्या महज 4.4% थी। खाद्य कीमतों में नरमी के कारण हेडलाइन से सीपीआई संख्या में बहुत राहत दिखती है। लेकिन कीमतों के अन्य उपायों को देखने पर स्थिति बदल जाती है।

उदाहरण के लिए अक्तूबर 2020 में भारत में कच्चे तेल की कीमत 40.7 डॉलर प्रति बैरल थी। पेट्रोलियम मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक यह 22 अक्तूबर को 83.2 डॉलर पर पहुंच गई है। ब्लूमबर्ग कमोडिटी प्राइस इंडेक्स 25 अक्तूबर 2020 को 72.01 पर था। यह 25 अक्तूबर को बढ़कर 105.03 हो गया है। यदि कमोडिटी की कीमतों में वृद्धि जारी रहती है या यहां तक ​​कि अपने मौजूदा स्तरों पर बनी रहती है, तो ये भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली बाधाओं को बढ़ा देंगे।

अर्थव्यवस्था(Economy) में बढ़िया संकेत –

Nomura India Business Resumption Index (NIBRI) और आरबीआई के संकेतक दिसंबर 2021 की तिमाही में जीडीपी को मजबूत स्थिति में दिखा रहे हैं। साथ ही अर्थव्यवस्था की संभावनाएं भी निश्चित रूप से पिछले साल की तुलना में बेहतर दिख रही हैं। एक साल पहले (25 अक्तूबर, 2020 को समाप्त सप्ताह) की तुलना में 24 अक्तूबर को समाप्त सप्ताह में NIBRI 105.3 पर था।

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, दिसंबर 2021 को समाप्त तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर 6.8% रहने की उम्मीद है। हालांकि, इन आंकड़ों का मतलब यह नहीं है कि खपत की मांग में व्यापक उछाल की गारंटी है। क्योंकि आरबीआई के मौजूदा स्थिति सूचकांक (सीएसआई) में पिछले साल की तुलना में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है। सितंबर 2021 के दौर में यह 57.7 और एक साल पहले 49.9 पर था।

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