आपके घर से निकला ज़्यादा Kachra तो अब आपको देना होगा ज़्यादा User Charge!

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पहले की तरह अब Kachra सड़क पर नज़र नहीं आता न ही किसी को Kachra फेंकने कहीं जाना होता है आपके घर से ही गाड़ी Kachra ले जाती है लेकिन कुछ घरों से बहुत Kachra निकलता है तो कुछ घरों से कम Kachra निकलता है। लेकिन अब ज़्यादा Kachra फेंकना आपके लिए महंगा हो सकता है। Delhi में अब कूड़े के आधार पर लोगों को भुगतान करना होगा।

NCR Planning Board ने Delhi-NCR में सफाई व्यवस्था को लेकर जो रीजनल प्लान-2041 ड्राफ्ट तैयार किया है, उसे अगर लागू किया जाता है, तो जिस घर से जितना कूड़ा निकलेगा, उसे उतना ही अधिक User Charge भी देना होगा। यानी कम कूड़ा निकलने पर User Charge कम और अधिक पर अधिक देना होगा। वर्तमान में MCD ने User Charge की जो पॉलिसी बनाई है, वह मकानों के दायरे के अनुसार है। यानी प्रॉपर्टी का दायरा जितना बड़ा है, उसे उतना अधिक User Charge देना पड़ता है। लेकिन, प्लानिंग बोर्ड इसके पक्ष में नहीं है।

ड्राफ्ट रीजनल प्लान में Delhi-NCR की लोकल बॉडी (नगर निगम) को यह भी सुझाव दिया गया है कि कूड़े के लिए User Charge कलेक्ट करें। लेकिन, यह Charge कूड़े की मात्रा के अनुसार होना चाहिए। यानी जिस घर से जितना अधिक Kachra निकलता है, उससे उतना अधिक चार्ज देने की पॉलिसी सभी लोकल बॉडी को बनानी चाहिए। मकानों के दायरे के अनुसार User Charge कलेक्ट करना तर्क संगत नहीं है। ऐसा इसलिए कि कई ऐसे मकान हैं, जिसका दायरा काफी बड़ा है, लेकिन उसमें रहने वाले लोगों की संख्या एक या दो ही है। ऐसे में उससे अधिक User Charge कलेक्ट करना तर्कसंगत नहीं है। तीनों MCD में फिलहाल मकानों के दायरे के अनुसार ही कूड़े के लिए User Charge वसूल किया जाता है।

सॉलिड वेस्ट के ड्राफ्ट रिजनल प्लान-2041 में कहा गया है कि Delhi-NCR के शहरों से रोजाना करीब 20,099 मीट्रिक टन Kachra जनरेट होता है। तीनों MCD एरिया, दिल्ली कैंट बोर्ड और एनडीएमसी एरिया को मिलाकर रोजाना करीब 13,250 मीट्रिक टन, हरियाणा के शहरों से 2514.88, उत्तर प्रदेश के NCR शहरों से 3830.40 मीट्रिक टन और राजस्थान के NCR शहरों से 504 टन कूड़ा निकलता है। Delhi-NCR के इन शहरों से रोजाना इतनी अधिक मात्रा में निकलने वाले कूड़े को लैंडफिल साइट पर ले जाना समाधान नहीं है, बल्कि उस कूड़े का 90 प्रतिशत हिस्से का बेहतर री-यूज होना चाहिए। 10 प्रतिशत Kachra ही लैंडफिल साइट पर जाना चाहिए, ताकि भविष्य में गाजीपुर, भलस्वा या ओखला में बने कूड़े के पहाड़ की तरह कहीं और कूड़े का पहाड़ न बने।

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