धार्मिक भावनाओं के नाम पर Meat Shops बंद लेकिन Modi को गोश्त से पैसे कमाने में दिक्कत नहीं :Owaisi

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ऐसा माना जाता है कि मीट सबसे ज़्यादा मुस्लिम लोग ही खाते हैं लेकिन हक़ीक़त क्या है वो सब जानते हैं। मीट को पसंद करने वालों की लिस्ट लम्बी है। सिर्फ मुस्लिम ही नहीं बल्कि सभी धर्म- मज़हब के लोग मीट खाना पसंद करते हैं। यही वजह है कि मीट के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। भारत से मांस का आयात फिर से शुरू करने के लिए बांग्लादेश से केंद्र सरकार ने अपील की है। इन खबरों का हवाला देते हुए AIMIM प्रमुख Asaduddin Owaisi ने Modi सरकार पर निशाना साधा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका में भारत के उच्चायोग ने बांग्लादेश के मत्स्य पालन और पशुधन मंत्रालय को एक पत्र भेजा है, जिसमें यह अपील की गई है। दरअसल, बांग्लादेश सरकार ने स्थानीय पशु किसानों के हित को देखते हुए भारत से फ्रोजेन मीट के आयात पर रोक लगा दी थी, विशेष रूप से भैंस के मांस के आयात पर। अब जब आयात फिर से शुरू करने की बात सामने आई है तो Asaduddin Owaisi भड़क गए हैं। उन्होंने ट्वीट करके कहा, “धार्मिक भावनाओं के नाम पर मांस की दुकानें बंद हैं, लेकिन Modi को गोश्त से पैसे कमाने में कोई दिक्कत नहीं है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय उच्चायोग के पत्र में कहा गया है कि भारतीय निर्यातक और बांग्लादेशी आयातक संघ दोनों ने पिछले कुछ महीनों में इस मामले पर चिंता जताई है। दरअसल, आयात नीति में बदलाव के कारण पिछले कुछ महीनों में फ्रोजेन मीट का आयात नहीं हुआ है। मालूम हो कि भारतीय कंपनियां बांग्लादेश में उच्च गुणवत्ता वाले मांस के सबसे बड़े वैश्विक निर्यातकों में शामिल हैं।

Asaduddin Owaisi ने ट्वीट किया, “संघी लगातार मुस्लिम पशु व्यापारियों पर हमला करते हैं। राज्य सरकारें गोमांस पर प्रतिबंध लगाती हैं और यहां बूचड़खाने बंद कर देती हैं, लेकिन सरकार बड़े व्यापारियों को पैसा बनाने में मदद करना चाहती है।”

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