देश में एक तरफ तो Make In India का नारा है तो वही दूसरी तरफ हमारा देश विदेशी सामानों पर निर्भर है। रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार जंगी जहाज़ के निर्माण में 75 फीसदी व वायुयानों के निर्माण में 60 फीसदी तक सामग्री विदेशों से लेनी पड़ रही है। इससे देश में बनने वाले उपकरणों के लिए एक बड़ी कीमत विदेशी कंपनियों को जा रही है।

रक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार मंत्रालय ने बताया कि ऑर्डिनेंस फैक्टरी में विदेशी कंपोनेंट का इस्तेमाल घटा है। यह पिछले तीन सालों में औसतन 10 फीसदी ही रह गया है। लेकिन ऑर्डिनेंस फैक्टरी के कुछ उत्पाद जैसे की T-90 टैंक में 21 फीसदी और धनुष में यह 19 फीसदी के करीब रहा है। समिति की तरफ से लगातार विदेशी पुर्जों के इस्तेमाल को कम करने पर अच्छा खासा जोर दिया जा रहा है।

तेजस लड़ाकू विमान समेत अन्य यानों का निर्माण करने वाले एचएएल 40-60 फीसदी तक विदेशी कंपोनेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक सुखोई-30 एमकेआई में 40, तेजस में 43, एएलएच में 44 तथा डीओ-228 वायुयान में 60 फीसदी कल पुर्जे विदेशों से आयातित हैं।

रक्षा मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक जंगी जहाज़ का निर्माण करने वाली रक्षा कंपनी एमडीएल के प्रोजेक्ट 15बी और 17 ए जहाज़ के निर्माण में 72-75 फीसदी विदेशी सामान का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट वर्ष 2024-25 तक पूरा हो सकता है और इसके तहत कई जंगी जहाज़ का निर्माण किया जा रहा है।

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