नवरात्र एक हिंदू पर्व है, जो हामरे देश में बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है. नवरात्र का अर्थ होता है ‘नौ रातें’.

29 सितंबर रविवार से शारदीय नवरात्र का शुभारंभ हो गया है. नवरात्र एक हिंदू पर्व है, जो हामरे देश में बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है. नवरात्र का अर्थ होता है ‘नौ रातें’. इन नौ रातों में मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है. नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा।

नवरात्र के इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा अर्चना की जाती है. नवरात्र में व्रत और शक्ति आराधना की शुरुआत से पहले कलश स्थापना की जाती है लेकिन कलश स्थापना में कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

कलश सोना, चांदी, पीतल, तांबा या मिट्टी का होना चाहिए. मिट्टी के ऐसे कलश का प्रयोग नहीं करना चाहिए, जिसमें छेद होने की संभावना हो. कलश में गंगा जल, तीर्थ, नदी, तालाब, झील या किसी पवित्र कुंड का जल कलश डाल सकते हैं. कलश के नीचे सप्त-मृत्तिका यानी सात तरह की मिट्टी रखने का विधान है।

वहीं घट स्थापना का भी मुहूर्त होता है. इसी मुहूर्त में घट स्थापना करनी चाहिए. इस साल 4 शुभ मुहूर्त हैं।

सुबह 7:45 से 09:15 तक

सुबह 09:15 से 10:43 तक

सुबह 11:02 से दोपहर 12:05 तक

दोपहर 01:45 से 03:05 तक

चलिए आपकों बताते हैं इन नौ दिनों में आपको क्या करना चाहिए और क्या करने से बचना चाहिए।

 चलिए आपको बताते हैं इन नौ दिनों में आपको क्या करना चाहिए और क्या करने से बचना चाहिए।

नवरात्रि के इन पावन दिनों में मां के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. सफलता पाने के लिए नवरात्रि के दौरान घरों में जौ बोने चाहिए. इसके साथ ही दुर्गा सप्तशती पाठ, वाल्मीकि रामायण व रामचरितमानस आदि का पाठ करने का विधान है।

शास्त्रों के अनुसार मां के इन नौ दिनों में हमें पूजा-अर्चना करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान देना चाहिए. इन नियमों का अगर हम पालन करेंगे तो मां हमसे अवश्य ही प्रसन्न होगी और मनवांछित वरदान देगी. शास्त्रों के अनुसार अगर इन नियमों का पालन नहीं किया गया तो माता रानी का आशीर्वाद नहीं मिलता है।

वहीं घर में कलश स्थापना करने के बाद घर को खाली नहीं छोड़ना चाहिए. किसी ना किसी व्यक्ति को घर में हमेशा रहना चाहिए।

इन दिनों दिन के समय में सोना भी नहीं चाहिए.नवरात्रि के दिनों में हमें मन को शांत रखकर सिर्फ मां का ध्यान करना चाहिए।

नवरात्र के पावन दिनों में प्याज लहसुन और मांस मदिरा का सेवन ना करें. नवरात्र के नौ दिनों तक पूर्ण सात्विक आहार लेना चाहिए।