होली पर कैसे करें नकली और असली मिठाई की पहचान

होली का त्यौहार नजदीक है ऐसे में बाजारों में मिठाई की डिमांड बढ़ जाती है। ऐसे में मिलावटखोरी करने वालों का कारोबार गुलजार हो जाता है। कई दुकानदार मोटे मुनाफे के चक्कर में मिलावटी मिठाईयां भी बनाने लगते हैं जिसका खामियाजा ग्राहक को उठाना पड़ता है और ऐसी मिठाईयों को खाने से लोग बीमार पड़ जाते हैं। हर बार त्यौहारों के सीजन में खाद्य सुरक्षा विभाग अतिरिक्त एहतियात भी बरतता है लेकिन इसके बावजूद मिलावटखोरी पर पूरी तरह से अंकुश नहीं लग पाता है। लेकिन अगर आप मिठाई खरीदने से पहले थोड़ा ध्यान दें तो आप आसानी से असली और नकली मिठाई की पहचान कर सकते हैं। इसके अलावा आप हमेशा मिठाई लेते वक्त दुकानदार से बिल जरूर लें ताकि अगर किसी तरह की समस्या हो तो दुकानदार की जिम्मेदारी तय हो सके। दरअसल मिलावट करने वाले दुकानदार मावे में घटिया सॉलिड मिल्क मिलाते हैं। जिसका किडनी और लीवर पर बुरा असर पड़ता है साथ ही इससे कई बीमारियां भी हो सकती हैं

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असली-नकली की पहचान का तरीका

अगर दूध में मिलावट की पहचान करनी हो तो थोड़े से दूध में दूध जितना ही पानी मिलाएं, झाग आए तो समझ लें कि इसमें डिटर्जेंट मिला हुआ है

सिंथेटिक दूध की पहचान के लिए उसे हथेलियों के बीच रगड़ें अगर साबुन जैसा लगे तो दूध सिंथेटिक हो सकता है वहीं सिंथिटिक दूध गर्म करने पर हल्का पीला हो जाता है

मावा असली है या नकली इसकी पहचान के लिए फिल्टर पर आयोडीन की दो से तीन बूंद जरूर डालें अगर फिल्टर काला पड़ जाए तो समझ लें कि मावे में मिलावट है मावे को उंगलियों के बीच मसलने पर अगर दाने जैसा लगे तो भी ये समझ जाएं कि ये मावा मिलावटी है

मिलावटी घी की पहचान करनी हो तो इसमें कुछ बूंदें आयोडिन टिंचर की मिला लें अगर घी का रंग नीला हो जाए तो ये घी मिलावटी हो सकता है। बता दें कि अक्सर मिलाटवटखोर घी में आलू या शकरकंद की मिलावट करते हैं।

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