यहां श्मशान में भस्म से खेली जाती है होली

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यहां श्मशान में भस्म से खेली जाती है होली

जलती लाशें, उड़ता धुआं, जिंदगी और मौत के बीच भला होली का खेल, भले ही सुनने में अजीब लगे लेकिन होली का ये रंग भी हमारे देश में देखने को मिलता है। वो भी कहीं और नहीं बाबा भोले की नगरी काशी में। यहां रंग की जगह भस्म ले लेता है और चेहरे रंगों में नहीं भस्म नहीं। श्मशान में होली के दौरान चिताएं जलती रहती हैं और भक्त हर-हर महादेव के नारे लगाते हुए एक दूसरे के शरीर को भस्म से सन देते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव स्वयं इस अंदाज में होली खेलते हैं।

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अब होली मनाने की ये परंपरा कब से शुरु हुई ये तो कोई नहीं जानता लेकिन मणिकर्णिका घाट पारंपरिक रिति-रिवाज से पूजा अर्चना के बाद बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठता है और फिर शुरु होता है भस्म से होली का खेल, जो पहली बार यहां पर होली के इस रंग को देखता है उसे थोड़ा अजीब जरूर लगता है लेकिन होली मनाने का ये तरीका यहां सदियों से चला आ रहा है।

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